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जवानी

अमल श्रीवास्तव 
बिलासपुर(छत्तीसगढ़)

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बहुत कुछ कर गुजरने को,मचलती भावनाएं जब,
नहीं अन्याय सह पाती,रगों में वह रवानी है।
न केवल उम्र से ही वास्ता होता है सब उसका,
जवानी जगमगाती ज्योति की उज्ज्वल निशानी है॥

देश के दुश्मनों का जो,कलेजा चीर कर रख दे,
लगाए जख्म में मरहम,हृदय की पीर जो हर ले।
अनीति टिक नहीं सकती,जहां पर यह उफनती है,
उगाए हाथ में सरसों,लिखे नूतन कहानी है।
जवानी जगमगाती ज्योति की उज्ज्वल निशानी है॥

नशे से,दुर्व्यसन से जो,सदा ही दूर है रहती,
सृजन,सौजन्य से,दुष्वृत्तियों का,श्राद्ध जो करती।
इरादे नेक हों जिसके,न बलिदानों से घबराए,
निकाले तेल बालू से,यही हिम्मत रूहानी है।
जवानी जगमगाती ज्योति की उज्ज्वल निशानी है॥

पलट तूफान के रुख को,नदी की धार जो मोड़े,
मृदुल मुस्कान से नफ़रत,घृणा की रीढ़ जो तोड़े।
अनैतिक कृत्य से जो जूझती,आठों पहर रहती,
जवानी अंबिका है,चंडिका है,और भवानी है।
जवानी जगमगाती ज्योति की उज्ज्वल निशानी है॥

चलो तरूणों उठो,जागो,जगत जननी बुलाती है,
चुकाने दूध की कीमत,टेर तुमको लगाती है।
बहुत उम्मीद है तुमसे,व्यथित,व्याकुल मनुजता को,
जहां में दिव्य तत्वों की,पुनः सरिता बहानी है।
जवानी जगमगाती ज्योति की उज्ज्वल निशानी है॥

धर्म के क्षेत्र में तुमको,पुनः गांडीव लाना है,
सकल ब्रह्मांड में फिर न्याय का,डंका बजाना है।
कफ़न को बांध कर सर पर,निकालो कर्मवीरों को,
धधकती विश्व वसुधा मैं,पवन शीतल बहानी है।
जवानी जगमगाती ज्योति की उज्ज्वल निशानी है॥

परिचय-रायपुर में  बैंक में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर कार्यरत अमल श्रीवास्तव का वास्तविक नाम शिवशरण श्रीवास्तव हैl`अमल` इनका उपनाम है,जो साहित्यकार मित्रों ने दिया हैl अमल जी का जन्म म.प्र. के कटनी जिले के ग्राम करेला में हुआ हैl आपने गणित विषय से बी.एस-सी.की करके बैंक में नौकरी शुरू कीl आपने तीन विषय(हिंदी,संस्कृत,राजनीति शास्त्र)में एम.ए. भी किया हैl आपने रामायण विशारद की भी प्राप्त की है,तो पत्रकारिता एवं आलेख संरचना का प्रशिक्षण भी लिया हैl भारतीय संगीत में आपकी रूचि है,इसलिए संगीत में कनिष्ठ डिप्लोमा तथा ज्योतिष में भी डिप्लोमा प्राप्त किया हैl वर्तमान में एम्.बी.ए. व पी-एचडी. जारी हैl शतरंज के उत्कृष्ट खिलाड़ी,वक्ता और कवि श्री श्रीवास्तव कवि सम्मलेनों-गोष्ठियो में भाग लेते रहते हैंl मंच संचालन में महारथी अमल जी लेखन विधा-गद्य एवं पद्य हैl देश के नामी पत्र-पत्रिका में आपकी रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैंl रचनाओं का प्रसारण आकाशवाणी केन्द्रों से भी हो चुका हैl विभिन्न धार्मिक,सामाजिक,साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े होकर प्रांतीय पदाधिकारी भी हैंl गायत्री परिवार से भी जुड़े होकर कई प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पुरस्कृत होते रहे हैंl महत्वपूर्ण उपलब्धि आपके प्रथम काव्य संकलन ‘अंगारों की चुनौती’ का म. प्र. हिंदी साहित्य सम्मलेन द्वारा प्रकाशन एवं तत्कालीन मुख्यमंत्री सुन्दरलाल पटवा द्वारा उसका विमोचन सहित राज्यपाल दिनेश नंदन सहाय द्वारा सम्मानित किया जाना हैl