राधा गोयल
नई दिल्ली
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जहाँ धरती, गौ, तुलसी मैया को माता कह के बुलाते हैं,
जहाँ मात-पिता को गणपति जी भगवान मानकर पूजते हैं।
वृक्ष, सूर्य, चन्द्र,अग्नि, वरुण को देव मान पूजा जाता,
हर प्राणी में भगवान बसा, जिस देश में सिखलाया जाता।
जहाँ अन्न को अन्न देवता कह, प्रसाद समझकर खाते हैं,
माता को देवी मान जहाँ, जागरण कराए जाते हैं।
जब फसलों को बोया जाता, नवरात्र मनाए जाते हैं।
चैत्र मास में होली के, उल्लास मनाए जाते हैं।
शारदीय नवरात्रों में, पण्डाल लगाए जाते हैं।
राम प्रभु की लीला के, दरबार सजाए जाते हैं।
पूर्वजों के लिए श्राद्ध करके, करते हैं हम उनका तर्पण,
मात-पिता की सेवा में, जहाँ श्रवण करे जीवन अर्पण।
ऐसी धरती पर जन्म मिले, तो जीवन मेरा धन्य होगा,
जन्म-जन्म के जीवनचक्र से, मुक्त मेरा जीवन होगा॥