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डॉ. शुक्ल की लघुकथाएं विभिन्न आयामों की अनमोल धरोहर

पटना(बिहार)।

हिंदी साहित्य में लघुकथा की अपनी अलग पहचान बन चुकी है। जो रचनाकार सार्थक लघुकथाओं का सृजन करने में सदैव अग्रणी रहे हैं, उनमें डॉ. योगेंद्रनाथ शुक्ल का नाम भी आता है, जो लंबे समय से लघुकथाओं का सृजन कर रहे हैं और कम शब्दों में सर्वाधिक प्रभावशाली अभिव्यक्ति देने के लिए पहचाने जा रहे हैं। डॉ. शुक्ल की पुस्तक ‘लघुकथाओं का ‘खजाना’ सिर्फ बहुमूल्य शब्दों की संपदा नहीं, बल्कि जीवन के विविध आयामों को दर्शाने वाला अनमोल धरोहर भी है।
भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के तत्वावधान में ऑनलाइन लघुकथा सम्मेलन के प्रथम सत्र में डॉ. योगेंद्र नाथ शुक्ल की लघुकथा कृति ‘लघुकथाओं का खजाना’ की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए उक्त विचार साहित्यकार सिद्धेश्वर ने व्यक्त किए। इस
आयोजन के पहले सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. शुक्ल (इंदौर) ने अपनी लघुकथाओं का पाठ किया। उन्होंने कहा कि लघुकथा आज सर्वाधिक प्रासंगिक विधा है, किन्तु वह साहित्य ही श्रेष्ठ माना जाता है, जो समाज की मांग के अनुसार रचा जाता है। आज समाज हमसे सोई संवेदना को जगाने, हमारे मूल्यों और संस्कारों से जोड़ने वाले साहित्य की मांग कर रहा है।
अध्यक्षता करते हुए चर्चित लघुकथा लेखिका मिन्नी मिश्रा ने कहा कि मुझे पहली बार एक साथ इतनी श्रेष्ठ लघुकथा सुनने का अवसर प्राप्त हुआ है।
सम्मेलन के दूसरे सत्र में देशभर के एक दर्जन से अधिक लघुकथाकारों ने अपनी प्रतिनिधि लघुकथाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया।

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