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तन्हाई से उबारता है संगीत

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’
अलवर(राजस्थान)
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संगीत की दुनिया भी एक अजीब दुनिया है। लोगों के दिल और दिमाग को तरोताजा करने वाली दुनिया। जो लोग अपने-आपको तन्हा महसूस करते हैं, उनको संगीत सुनना चाहिए। रास्ते में अकेला चलने वाले व्यक्ति का साथी संगीत ही होता है। वो गुनगुनाते हुए कब मंजिल पर पहुंच जाता है, पता ही नहीं चलता।
वास्तव में संगीत योग की तरह है, जो हमेशा हमें दुरुस्त रखता है। संगीत से शारीरिक एवं मानसिक तनाव हमेशा के लिए दूर हो जाता है। लोगों में प्रसन्नता के भाव जागृत होते हैं।
अगर कोई सच्चा मित्र है, तो वो है संगीत। जीवन की भाग-दौड़ में और इस भ्रष्ट संसार में जहां हर कोई एक-दूसरे की टांग खींचने में लगा है, हानि पहुंचाने में लगा है, वहीं मैंने अपने वास्तविक जीवन में महसूस किया है कि संगीत वास्तव में तरोताजा एवं खुश रखने का एक साधन है, जो लोगों में ऊर्जा का संचार करता है।
मैं हमेशा संगीत के प्रति प्रतिबद्ध रहा हूँ और हमेशा सुबह आध्यात्मिक संगीत सुनता हूँ। जब भी अपने-आपको अकेला महसूस करता हूँ, बस संगीत की दुनिया में खो जाता हूँ, और ऐसा महसूस करता हूँ कि सारी दुनिया मेरे पास है।
प्राचीन काल से ही संगीत का विशेष महत्व रहा है। ऐसा माना जाता है कि वैदिक काल से पहले ही संगीत का जन्म हो गया था। एक मान्यता के अनुसार स्वयं ब्रह्मा जी ने नारद मुनि को संगीत का वरदान दिया था।
भारतीय संस्कृति में भी संगीत का विशेष महत्व रहा है। भारत भूमि में संगीत के बहुत बड़े- बड़े कलाकारों ने जन्म लिया है। ऐसा कहते हैं कि जब भी ये कलाकार दिल की गहराइयों से और भावनाओं से धुन निकालते थे, तो स्वत: ही दीपक प्रज्वलित हो जाते थे। फूल खिल जाया करते थे और पक्षी भी कलरव करने लग जाते थे।
वास्तव में संगीत में भावनाओं की ताकत है, जो लोगों में सकारात्मक सोच जाग्रत करता है एवं उत्साहवर्धन करता है। संगीत की मधुर आवाज़ लोगों में नकारात्मक सोच से मुक्ति दिलाती है। लोगों को हर सुबह आध्यात्मिक संगीत सुनना चाहिए। इसमें वो शक्ति है, जिससे हमारी ध्यान साधना मजबूत होती है तथा उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

परिचय- ताराचंद वर्मा का निवास अलवर (राजस्थान) में है। साहित्यिक क्षेत्र में ‘डाबला’ उपनाम से प्रसिद्ध श्री वर्मा पेशे से शिक्षक हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में कहानी,कविताएं एवं आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। आप सतत लेखन में सक्रिय हैं।