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थामता हाथ, निभाता साथ

अजय जैन ‘विकल्प’
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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यदि आप नहीं होते तो…(शिक्षक दिवस विशेष)…..


गुरु कुम्हार,
गढ़ता है भविष्य-
देता है मार।

युग निर्माता,
निकालता है खोट-
सबको भाता।

ज्ञान भंडार,
बनता संजीवनी-
देता दुलार।

करें सम्मान,
भविष्य रचयिता-
दीजिए मान।

समझे मर्म,
बाहर से कठोर-
भीतर नर्म।

थामता हाथ,
फैलाता है उजाला-
निभाता साथ।

ज्ञान खदान,
देते जीवन सीख-
गुरु महान।

रचनाकार,
दे पाठ मानवता
सृजनकार।

कोटि वंदन,
करते बेड़ा पार-
शिक्षा नंदन॥