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नाना रंग दिखाती होली

डॉ.एन.के. सेठी
बांदीकुई (राजस्थान)

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जीवन और रंग..

फागुन की मस्ती में झूमे,
नाचे मस्तानों की टोली।
लाई मस्ती की बहार ये,
नाना रंग दिखाती होली॥

रंग अबीर गुलाल उड़ाते,
पीकर भंग करे हुडदंग।
मस्ती में झूमे मस्ताने,
नाचे और बजाए चंग।
चेहरे सभी लाल हुए हैं,
नयनों से मारे ज्यों गोली।
लाई मस्ती की बहार ये,
नाना रंग दिखाती होली…॥

टेसू के रक्तिम फूलों से,
कुदरत अपने रंग दिखाती।
अलसायी-सी धूप सुनहरी,
आज सभी के मन को भाती।
रंग-बिरंगा फागुन आया,
झूमे हुरियारों की टोली।
लाई मस्ती की बहार ये,
नाना रंग दिखाती होली…॥

विविध रंग लगाए चेहरे,
आपस के सब भेद मिट गए।
छोटा-बड़ा न ऊंचा-नीचा,
सारे नकली रंग हट गए।
खत्म हुई पहचान सभी की,
केवल दिखती सूरत भोली।
लाई मस्ती की बहार ये,
नाना रंग दिखाती होली…॥

एक-दूजे के चेहरे पर,
रंग प्यार का खूब लगाओ।
भूल पुराने द्वेष भाव को,
सच्चा प्यार सभी से पाओ।
जीवन का हर रंग अनोखा,
बोलें सबसे मीठी बोली।
लाई मस्ती की बहार ये,
नाना रंग दिखाती होली…॥

क्या बच्चे क्या बूढ़े सारे,
मर्यादाएं टूट रही है।
रंग की धार भिगोय तन को,
पिचकारी से छूट रही है।
साजन संग चले सजनी भी,
करते दोनों हँसी ठिठोली।
लाई मस्ती की बहार ये,
नाना रंग दिखाती होली…॥

परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय में प्राचार्य (बांदीकुई,दौसा) डॉ.एन.के. सेठी का बांदीकुई में ही स्थाई निवास है। १९७३ में १५ जुलाई को बड़ियाल कलां,जिला दौसा (राजस्थान) में जन्मे नवल सेठी की शैक्षिक योग्यता एम.ए.(संस्कृत,हिंदी),एम.फिल.,पीएच-डी.,साहित्याचार्य, शिक्षा शास्त्री और बीजेएमसी है। शोध निदेशक डॉ.सेठी लगभग ५० राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में विभिन्न विषयों पर शोध-पत्र वाचन कर चुके हैं,तो कई शोध पत्रों का अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशन हुआ है। पाठ्यक्रमों पर आधारित लगभग १५ से अधिक पुस्तक प्रकाशित हैं। आपकी कविताएं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। हिंदी और संस्कृत भाषा का ज्ञान रखने वाले राजस्थानवासी डॉ. सेठी सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत कई सामाजिक संगठनों से जुड़ाव रखे हुए हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत तथा आलेख है। आपकी विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोध-पत्र का वाचन है। लेखनी का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है। मुंशी प्रेमचंद इनके पसंदीदा हिन्दी लेखक हैं तो प्रेरणा पुंज-स्वामी विवेकानंद जी हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-
‘गर्व हमें है अपने ऊपर,
हम हिन्द के वासी हैं।
जाति धर्म चाहे कोई हो,
हम सब हिंदी भाषी हैं॥’

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