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नारी तेरी अमर कहानी

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’
बसखारो(झारखंड)
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जो समझो तो कविता हो,
बूझो तो अमर कहानी हो।
नारी तुम त्याग समर्पण,
करती बलिदान जवानी हो।

नारी!तुम श्रद्धा समर्पण जीवन,
सृष्टि जीवन गढ़ती कहानी हो।
आँचल में दूध आँखों में पानी,
सृष्टि जीवन की तुम कहानी हो।

नारी! तुम अब नहीं रही अबला,
समानता युग की तुम सबला हो।
नहीं कमजोर तुम,नहीं तू अबला,
नवनिर्माण की अब तुम निशानी हो।

कभी बेटी,कभी बहना,माँ कभी,
बनती तुम पत्नी प्रेम दीवानी हो।
कभी लक्ष्मी,काली,कभी शारदा,
दुर्गा,सती,बनती कभी भवानी हो।

नारी! तुम तन-मन करती अर्पण,
करती त्याग बलिदान जवानी हो।
नौ माह प्रसव वेदना सहता तन,
सृष्टि गढ़ती तुम अमर कहानी हो।

कभी सबरी,कभी सीता,कभी
राधा,कभी मीरा प्रेम दीवानी हो।
महाभारत रचती द्रौपदी,कभी
हर युग की लिखती कहानी हो।

यत्र नार्यस्तु पूज्यंते,रमन्ते तत्र,
देवता रचती श्लोक पुराणी हो।
नारी! तुम केवल श्रद्धा-समर्पण,
सृष्टि सृजन की अमर कहानी हो॥

परिचय- पंकज भूषण पाठक का साहित्यिक उपनाम ‘प्रियम’ है। इनकी जन्म तारीख १ मार्च १९७९ तथा जन्म स्थान-रांची है। वर्तमान में देवघर (झारखंड) में और स्थाई पता झारखंड स्थित बसखारो,गिरिडीह है। हिंदी,अंग्रेजी और खोरठा भाषा का ज्ञान रखते हैं। शिक्षा-स्नातकोत्तर(पत्रकारिता एवं जनसंचार)है। इनका कार्यक्षेत्र-पत्रकारिता और संचार सलाहकार (झारखंड सरकार) का है। सामाजिक गतिविधि के अन्तर्गत विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से प्रत्यक्ष रूप से जुड़कर शिक्षा,स्वच्छता और स्वास्थ्य पर कार्य कर रहे हैं। लगभग सभी विधाओं में(गीत,गज़ल,कविता, कहानी, उपन्यास,नाटक लेख,लघुकथा, संस्मरण इत्यादि) लिखते हैं। प्रकाशन के अंतर्गत-प्रेमांजली(काव्य संग्रह), अंतर्नाद(काव्य संग्रह),लफ़्ज़ समंदर (काव्य व ग़ज़ल संग्रह)और मेरी रचना  (साझा संग्रह) आ चुके हैं। देशभर के सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। आपको साहित्य सेवी सम्मान(२००३)एवं हिन्दी गौरव सम्मान (२०१८)सम्मान मिला है। ब्लॉग पर भी लेखन में सक्रिय श्री पाठक की विशेष उपलब्धि-झारखंड में हिंदी साहित्य के उत्थान हेतु लगातार कार्य करना है। लेखनी का उद्देश्य-समाज को नई राह प्रदान करना है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-पिता भागवत पाठक हैं। विशेषज्ञता- सरल भाषा में किसी भी विषय पर तत्काल कविता सर्जन की है।