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नारी-भारत माँ की मूरत

शिवम् सिंह सिसौदियाअश्रु
ग्वालियर(मध्यप्रदेश)

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‘अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ स्पर्धा विशेष…………………

नारी मैंने तो तुझमें भारत माँ की मूरत देखी थी,
सरस्वती लक्ष्मी दुर्गा सीता की सूरत देखी थी।

मैंने था तुझको प्रेम किया,था मैंने तुझको माँ माना,
तुझको ही लक्ष्मीबाई,पद्मावती,धाय पन्ना जाना।

तूने ही दाँत किये थे खट्टे,दुश्मन के-अँग्रेजों के,
आज बनी मखमली फूल,बिस्तर युवकों की सेजों के।

तूने ही देश की रक्षा को था अपना सब बलिदान किया,
आज मगर लज्जा,सनेह,मर्यादा का अपमान किया।

पद्मावती समान कभी था आत्ममान तेरा जागा,
पर भोग विलासों में रम अब तूने संस्कारों को त्यागा।

खिलजी देख न पाये मुख,चाहे आगे उसके दर्पण,
पर आज उभारों को तन के,कर रही बज़ारों में अर्पण।

इतिहास नग्न दुर्वासा की,तूने ही लाज बचाई है,
पर आज त्याग चुनर खुद ने,खुद की ही लाज गँवाई है।

जब कटी कृष्ण की उँगली थी,था साड़ी का टुकड़ा बाँधा,
फिर भार तेरी लज्जा की रक्षा का था उसने ही साधा।

पर आज स्वयं ही वस्त्र त्यागकर,नग्न हुई तू जाती है,
गुरुजन,माता,भ्राता,पितु की,तू छोटी सोच बताती है।

तूने अनुसुइया,सीता,पद्मा,लक्ष्मी को बिसराया है,
जो नित्य नये नर को चूमें,उनको आदर्श बनाया है।

चलचित्रों में जो छोटे-छोटे वस्त्र पहन इठलाती है,
जो नित्य नई बाँहे झूलें,उनको आदर्श बनाती है।

कभी लगाती थी नारी तू,पावन यज्ञों के फेरे,
आज तुझे भाते हैं,पर पुरुषों की बाँहों के घेरे।

फिर लौट के आ मर्यादा में,ये संस्कृति तुझे बुलाती है,
ये परम्परा पावन कुलीन,सभ्यता रोती गाती है।

बेशक पुरुषों के कंधों से,कंधों को मिलाकर चलती जा,
लेकिन सभ्यता की रक्षा करने को तो वापिस आजा।

तू त्याग वेश अश्लील,बार-मय के प्यालों से आज लजा,
तू फिर से पतिव्रता पत्नी,बहना भारत माता बन जा॥

परिचय-शिवम् सिंह सिसौदिया का साहित्यिक उपनाम `अश्रु` है l इनकी जन्म तारीख २६ जनबरी १९९५ एवं ग्वालियर(म.प्र.)में जन्मे हैंl वर्तमान में बहोड़ापुर(ग्वालियर)में बसे हुए हैंl हिन्दी, संस्कृत व अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखने वाले श्री सिसौदिया की शिक्षा बी.कॉम. व एम.ए.(संस्कृत)हैl यह कार्यक्षेत्र में निजी शाला में अध्यापक हैंl सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ में दीक्षित हैंl आपकी लेखन विधा-काव्य(कविता,गीत,ग़ज़ल,लेख,दोहे,सवैया आदि)हैl पत्रिका में लेख व कविताएँ प्रकाशित हुई हैंl इनको कुछ साहित्यिक प्रतियोगिताओं में प्रथम,द्वितीय व तृतीय स्थान पर पुरस्कृत किया गया है तो ग्वालियर में सप्तम शिक्षक सम्मान समारोह सितम्बर २०१८) एवं अगस्त २०११ में ग्वालियर में तुलसी मानस प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान आदि प्राप्त हैl ब्लॉग पर भी अपनी बात रख्गने वाले अश्रु की विशेष उपलब्धि मध्य भारतीय हिन्दी साहित्य सभा(ग्वालियर) से सम्मान मिलना हैl इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी भाषा,धर्म,भक्ति,साहित्य और भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार तथा निजी हृदय भावों को व्यक्त करने के साथ भी हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलवाना हैl आपके लिए प्रेरणा पुंज-भगवान श्री कृष्ण,गुप्त व्यक्ति,रसखान,सूरदास,तुलसीदास,मीराबाई,चैतन्य महाप्रभु, बिहारी जी,दिनकर जी,निराला जी,महादेवी वर्मा और डॉ.कुमार विश्वास हैl इनकी विशेषज्ञता-हिन्दी व संस्कृत का ज्ञान और चित्रकला में हैl