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पुण्य भूमि मेरी धरा

सुषमा दुबे
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष………


मेरे देश की सीमाएं रहें महफूज चारों ओर से,
हर एक दुआ में समाई है यही शुभ भावना
दिग-दिगंत तक कीर्ति गाथा के मधुर स्वर,
देश मेरा हो अमर बस है यही मनोकामना।

मिट्टी का कण-कण बने स्वर्ण रजत-सा,
जर्रा-जर्रा महके मेरी मातृभूमि का जैसे चंदन
स्वर्ग-सा आनंद छाए हर निशा हो अलौकिक,
हर उषा गाए प्रभाती और वतन का करे वंदन।

देश मेरा है प्रथम मुझको यही वरदान दो माँ,
हर साँस से निकले सदा जय गान तेरा
हर जन्म में लूँ जन्म तेरे ही आँचल में लिपट कर,
तेरी शस्य श्यामल गोद हो मेरा बसेरा।

जब मरूं देश की खातिर,देह लिपटी हो तिरंगे में,
हर जन्म में नव गीत हो तेरे,तेरी ही गाथा
इस धरा की पुण्य भूमि को समर्पित मेरा तन,
अमर रहे मेरी मातृभूमि अमर रहे मेरी भारत माता॥