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पूर्वोत्तर राज्यों में गृह युद्ध की आशंका!

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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भाई जैसा दोस्त नहीं और भाई जैसा दुश्मन नहीं,इसके जीते-जागते उदाहरण रामायण काल,महाभारत काल से लेकर यह नियति निश्चित है। हमारे देश में विभाजन के बाद जो स्थिति बनी है,वह भी आज दुश्मनों से कम नहीं। आज ७३ साल हो गए,पर दुश्मनी की दरार नहीं पट पाई। यह टूटन आजादी के पूर्व से शुरू हुई थी,जो विभाजन के बाद और चौड़ी हुई।
जब प्रेम होता है तब गलती पतली होती है, और जब प्रेम पतला होता है,तब गलती मोटी हो जाती है। ऐसे ही विभाजन के बाद तो दुश्मनी और संगीन हो गई,हर बात का विश्लेषण और पोस्टमार्टम होना शुरू हुआ। मजेदार बात यह है कि सब एक-दूसरे की बारीक से बारीक और गुप्त बातें जानते हैं। पिछले युद्धों से पता चलता है कि,उस देश द्वारा कितना निम्न स्तरीय कृत्य किया गया और वर्तमान में भी वही परिपाटी निभा रहे हैं। कारण उन्हें कितना भी समझाओ,नहीं समझते।
जो समाचार प्राप्त हो रहे हैं,उनसे लगता है कि वहां की स्थिति नाजुक और ग़मगीन हैं,जो निश्चित ही चिंतनीय है। नई सरकार अपना दायित्व निभा रही है,पर मिजोरम पर बड़ी मुसीबत आ पड़ी है। कारण आसाम मुहाने पर है। सी के यहाँ से रसद,आवागमन की पूर्ति होती है। कालाबाज़ारी,अवैध औषधि,प्रवासी का आना-जाना सुगम होने से दूसरे राज्य में अव्यवस्था होने से परेशानी हो रही है।
सही अर्थों में नार्थ ईस्ट में हिंसात्मक प्रवृत्ति होने से हिंसात्मक वातावरण बना रहता है। जिस स्थल पर हिंसा होती है,उनके द्वारा अन्य देशों के लोगों को संरक्षण दिया जाता है,और सम्भतः विदेशी ताकतों का भी संरक्षण मिल रहा हो तो कोई नई बात नहीं है।
ऐसे मामलों में केन्द्र सरकार को शीघ्र हस्तक्षेप करके मामला निपटना चाहिए, जिससे अन्य प्रांतों में इस प्रकार की घटनाएं न हो। देश में अमन-चैन की जरुरत है। इस कोरोना काल में जब देश विषम परिस्थियों से जूझ रहा हो,वहां इस प्रकार का तनाव बहुत ही दुखद और चिंतनीय है। आपसी वार्ता से हल निकालना चाहिए।

परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।

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