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पेड़ बचाना धर्म हमारा

अमिताभ प्रियदर्शी
रांची (झारखंड)
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लें संकल्प सभी यह प्यारा,
पेड़ लगााना धर्म हमारा।
सींंच हमेशा नेह नीर से,
उसे बचाना कर्म हमारा।

होंगे पेड़,धरा तब होगी,
तभी यहाँ फसल उपजेगी।
चारों ओर होगी हरियाली,
और सर-सर हवा चलेगी।

स्वच्छ वायु में साँस हम लेंगे।
हर्षित हो कर सभी कहेंगे,
पेड़ लगाना धर्म हमारा,
उसे बचाना कर्म हमारा।

जब सूरज उग्र हो जाता,
पेड़ हमें छाया दे जाता।
फल से इसके भूख मिटाते,
औषधीय गुुुण से रोग मिटातेे।

पेड़ों से ही तो जीव यहां हैं,
बिन इसके सुख और कहां है ?
यह जीवन पेड़ों बिन सूना,
ये धरती पर,और कहीं ना।

आओ मिलकर इन्हें बचायें,
और संदेशा यह दे जायें।
पेड़ लगाना धर्म हमारा,
उन्हें बचाना कर्म हमारा।

हम-सब हैं धरती के बंदे,
पर विकास से हो गये अंधे।
खोद-कोड़ कर इसे यहाँ हम,
बुनते खुद की जान के फंदे॥

परिचय-अमिताभ प्रियदर्शी का निवास रांची (झारखंड) में कांके रोड पर है। इनकी जन्मतिथि-५ दिसम्बर १९६९ तथा जन्म स्थान-खलारी(रांची) है। शिक्षा-एम.ए. (भूगोल) और पत्रकारिता में स्नातक उपाधि,जबकि कार्यक्षेत्र-पत्रकारिता और काव्य साधना है। १९८९ से पत्रकारिता कर रहे अमिताभ जी ने कई राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक अखबारों में कार्य किया है तो २ अखबार में सम्पादक भी रहे हैं। फिलहाल एक मासिक पत्रिका के प्रकाशन से जुड़े हुए हैं,तो आकाशवाणी रांची से समाचार वाचन एवं उद्घोषक के रुप में भी सहभागी हैं। २०१४ से वेबसाईट का संचालन भी कर रहे हैं। आपकी लेखन विधा-कविता है। सम्मान के रुप में अमिताभ जी को गंगाप्रसाद कौशल पुरस्कार और कादमबिनी क्लब से पुरस्कार मिला है। ब्लाॅग पर भी लिखते हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं तथा रेडियो से भी आपकी रचनाएं प्रकाशित हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य-समाज को कुछ देना हैl