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प्रेम प्रतीक

डॉ.नीलम वार्ष्णेय ‘नीलमणि’
हाथरस(उत्तरप्रदेश) 
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आया होली का त्यौहार खुशियों के लिये,
ऐसी करें रब से प्रार्थना सभी के लिये।
कभी दु:ख नहीं हो पलभर के लिये,
एक-दूजे से गले मिलें,ज़िन्दगीभर के लियेll

सब पर रंग चढ़े ऐसी रंगाओ होरी,
काहू को दिल न जरै ऐसी जराओ होरी।
सब पर रंग…ll

केसरिया पीलौ लाल गुलाबी नीलौ हो,
अंग-अंग रंग चढ़ै गले लगाओ होरी।
सब पर रंग…ll

मन में भेदभाव ना ही कोई नफ़रत हो,
हर रंग प्यार चढ़ै खूब मनाओ होरी।
सब पर रंग…ll

बसंत ऋतु आगमन से आवै होरी,
उमंग तन में रही ब्रज में मचाओ होरी।
सब पर रंग…ll

लाल डमरू बाजै और ढोल बाजे है,
रंग हाथरस में खिले ऐसी खिलाओ होरीl
सब पर रंग…ll

याद करे नीलू पूल भरी होरी कूं,
रंग भद रंग न हो ऐसी रंगाओ होरी।
सब पर रंग चढ़े ऐसी रंगाओ होरीll

परिचय-डॉ.नीलम वार्ष्णेय का जन्म १६ सितम्बर को राधाष्टमी के दिन अलीगढ़ में हुआ है। आप शास्त्रीय संगीत में दिल्ली से एम.ए. के साथ ही तबला प्रवीण भी हैं। `नीलमणि` उपनाम लगाने वाली डॉ.वार्ष्णेय ने जमशेदपुर से एचएमबीएस के पश्चात हिन्दी में पी.एच-डी. की है। इनका निवास उत्तर प्रदेश स्थित हाथरस में हैl वर्तमान में आप संगीत कला केन्द्र में प्राचार्य एवं निदेशक पद पर कार्यरत हैं,साथ ही फिल्म,दूरदर्शन,म्यूजिक एल्बम,लेखन,निर्णायक,गीतकार,आकाशवाणी पर भी निरंतर सक्रिय रही हैंआपको अनेक मान-सम्मान,प्रशस्ति-पत्र, स्वर्ण पदक एवं प्रतीक चिन्ह प्राप्त हुए हैंआपकी लेखन विधा-कविता,गीत,ग़ज़ल, लेख आदि है। इनकी रचनाएँ अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैंआपने सम्पादन कार्य भी किया है। सामाजिक सेवा के कई कार्यक्रमों का संचालन एवं प्रसारण दूरदर्शन पर आपके खाए में है। आप कई संगठनों में जिलाध्यक्ष,उपाध्यक्ष और अध्यक्ष पद का कार्यभार सम्भाल चुकी हैं। हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु आप सदा प्रयासरत हैं