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बच्चों की जाँ होती है

सुबोध कुमार शर्मा 
शेरकोट(उत्तराखण्ड)

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माँ तो केवल माँ होती है,
वह बच्चों की जाँ होती है।
जीवन में जब पीड़ा आये,
अधरों पर केवल माँ होती है॥

माँ के अर्थ गूढ़ हैं कितने,
रहते जिसमें अगणित सपने।
हर दु:ख ओ व्याधि में भी,
माँ को लगते सब जन अपने॥

दु:ख को भी सुख सम समझे,
पूरे करती जब बेटे के सपने।
स्वर्ग सरिस जीवन हो जाता,
पूरे होते जब माँ के सपने।

असह्य पीड़ा माँ ही सहती,
माँ तो केवल माँ ही होती।
सूखे में स्व सुत सुला कर,
गीले में वह प्रतदिन सोती॥

सन्तति-अति सुख-कामना,
जीवनभर वह करती रहती।
सुयोग्य बने,सुखमय जीवन हो,
इसी कल्पना में वह डूबी रहती॥

परिचय – सुबोध कुमार शर्मा का साहित्यिक उपनाम-सुबोध है। शेरकोट बिजनौर में १ जनवरी १९५४ में जन्मे हैं। वर्तमान और स्थाई निवास शेरकोटी गदरपुर ऊधमसिंह नगर उत्तराखण्ड है। आपकी शिक्षा एम.ए.(हिंदी-अँग्रेजी)है।  महाविद्यालय में बतौर अँग्रेजी प्रवक्ता आपका कार्यक्षेत्र है। आप साहित्यिक गतिविधि के अन्तर्गत कुछ साहित्यिक संस्थाओं के संरक्षक हैं,साथ ही काव्य गोष्ठी व कवि सम्मेलन कराते हैं। इनकी  लेखन विधा गीत एवं ग़ज़ल है। आपको काव्य प्रतिभा सम्मान व अन्य मिले हैं। श्री शर्मा के लेखन का उद्देश्य-साहित्यिक अभिरुचि है। आपके लिए प्रेरणा पुंज पूज्य पिताश्री हैं।