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भारत की है शान तिरंगा

प्रो. बीना शर्मा
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आजादी के अमृत महोत्सव पर हर घर तिरंगा के उद्घोष ने पूरे देश के साथ-साथ आभासी जगत को भी तिरंगा कर दिया है। लोगों ने बड़े चाव से तिरंगे के साथ अपनी तस्वीर चस्पा कर ली है। घर, इमारत, कार्यालय, विद्यालय, सरकारी, गैर सरकारी संस्थाएं तिरंगे से ओत-प्रोत हैं। जगह-जगह जुलूस, नुक्कड़ सभाएं और देशभक्ति गीतों का आयोजन हो रहा है। स्वतंत्रता दिवस के २ दिन पूर्व से उत्साह का जो माहौल तैयार हुआ है, वह देखते ही बनता है। भारत की है शान तिरंगा, तभी तो आज घर-घर तिरंगा फहर रहा है। उन देशभक्तों, सेनानियों और कलमकारों को याद करने का दौर जारी है, जिन्होंने अपनी कलम से ओज के गीत रचकर जन-जन में वीरता का संचार किया, जो सोए हुए थे, उन्हें झकझोर कर जगाया।
झंडा केवल एक निश्चित आकार-प्रकार का रंगीन कपड़े का टुकड़ा भर नहीं, यह हमारे देश की अस्मिता का प्रतीक है। इसे फहराते हम गौरव से भर उठते हैं। विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा। इसकी शान न जाने पाए, चाहे जान भले ही जाए, विश्व विजय करके दिखलाएं, तब होवे प्रण पूर्ण हमारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा। ये झंडा ऊंचा बना रहे, लहर-लहर लहराता रहे, इसके लिए न जाने कितने वीरों ने अपनी जान गंवा दी, मातृभूमि पर बलिदान हो गए, खुद नंगे बदन लाठियां खा ली, पर झंडे को धरती पर नहीं गिरने दिया। हमें तिरंगा थमा दिया गया, इसकी रक्षा का वचन हमें निभाना है। जिस शौक और उत्साह के साथ इसे लहराया है, पन्द्रह अगस्त के बाद उतने ही सम्मान से इसे उतार कर तह कर रख देना है। प्रधानमंत्री ने घर-घर तिरंगा लहराने का जो जज्बा हममें भरा है, वह केवल ३ दिन के लिए नहीं है। ये ३ दिन तो प्रतीकात्मक हैं। इसकी रक्षा का, इसके रंगों को धुंधला न पड़ने का संकल्प हम सबका साझा है। जितने उत्साह से इसे हमने हर छोटे-बड़े स्थान पर लहराया है, उसे उतने ही सम्मान से उतार कर रखने का दायित्व भी जन-जन का है।
केसरिया वीरता के भाव को पुष्ट करता है, सफेद शान्ति और हरा समृद्धि व खुशहाली को। ये ३ रंग हमारे जीवन का ओजस हैं और २४ आरियों वाला चक्र हमें लगातार चलने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। ये तिरंगा हम सबके मन की शक्ति है, जिसे बार-बार परमात्मा से मांगा जाता है- हमको मन की शक्ति देना हे..। झंडे का सम्मान हमारे देश का सम्मान है। झंडे को फहराते हम ‘जन गण मन’ गाते हैं, सावधान की मुद्रा में खडे हो जाते हैं, उसे सम्मान से प्रणाम करते हैं, कोई वीर जवान सीमा पर लड़ते-लड़ते शहीद हो जाता है, तो उसका शव इसी तिरंगे में लिपट कर आता है। प्रभात फेरी और जुलूस में इसी झंडे को लेकर चलते हैं। हमारी पहचान है तिरंगा। भूखंड को जीतते तो झंडा गाड़ते ही हैं, पर अपने सदव्यवहार और सतत कार्यशीलता से भी सामने वाले के मन में अपना झंडा गाड़ आते हैं। ‘जीते हों किसी ने देश तो क्या, हमने तो दिलों को जीता है…।’
इस झंडे के सम्मान में कितने गीत लिखे गए, वह सब तो हमें कंठस्थ होने ही चाहिए, राष्ट्रीय पर्वों पर उन्हें बार-बार गाया गुनगुनाया जाना चाहिए, इससे भी हम बढ़ते हैं। न होते तो अभी तक नन्हें-मुन्ने क्यों सपना पाले रहते… ‘नन्हा-मुन्ना राही हूँ, देश का सिपाही हूँ…’ गाते-गाते देश के लिए कुछ करने का उत्साह जगता है। हिंद देश का प्यारा झंडा आगे सदा रहेगा, ये घर घर लहरेगा, क्योंकि हम इसे जान से भी अधिक प्यार करते हैं तभी तो गाते हैं ‘इसकी शान न जाने पाए, चाहे जान भले ही जाए…।’ वसुधा को कुटुम्ब मानने का भाव जो पैदा हो जाए तो दुनिया के झगड़े न निबट जाएं, पर कैसे निबटेंगे ये झगड़े, अभी तक तो परिवार ही कुटुम्ब में तब्दील नहीं हो पाए।
बना और बचा रहे झंडे का सम्मान, इसे लहराते हम गर्वित और गौरवान्वित होते रहें, इसके मान की रक्षा में अपना सर्वस्व अर्पित कर दें। हिमालय से शिक्षा लें खड़ा हिमालय बता रहा है डरो न आंधी पानी से, खडे रहो तुम अविचल होकर हर संकट तूफानी में। पृथ्वी कहती धैर्य न छोड़ो कितना भी हो सिर पर भार, नभ कहता है फैलो इतना ढक लो तुम सारा संसार। सूरज से रोशनी बांटना सीखें, हवा से नया जीवन देना। देने का भाव सीखना बहुत जरुरी है, अभी तो सामने वाले को यथायोग्य सम्मान भी नहीं दे पाते, और क्या दे पाएंगे भला। तो बचा रहे ये गौरव, बना रहे ये भाव, करते रहे मातृ भूमि का वंदन, वंदे मातरम से गूंजता रहे गगन, फहराता रहे हमारा तिरंगा और हम गाते रहें लहर-लहर लहराए भारत की शान तिरंगा।

(सौजन्य:वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई)