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भूले ही कब…..

डॉ.सोना सिंह 
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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किसे और कैसे नमन करूं ?
यह सवाल हर साल साल दर साल कौंधता है मन में।

कौन थे और आखिर कौन है वो ?
जो खाकी हरी वर्दी में निकलते हैं घर से,
फिर कभी न लौटने की संभावना के साथ।

लंबे दस्तावेजों पर लिख देते हैं वो,
अपना नाम जिस पर लिखा होता है उनके मरने का फरमान।

साल दर साल आता है इक दिन,
जिस दिन लगता है गीतों का मजमा
होती है भाषण की बौछार,
लगता है सिर्फ वही दिन
देशभक्ति से सरोबार।

फिर मन कचोटता है,
किसे और कैसे नमन करूं ?

आखिर क्या रिश्ता है उनका,
हम सबसे,जो करते हैं
खुद को देश पर निसार।

पटिटयां,तख्तियां,पर्चियां और झंडे,
याद दिलाते हैं उन लोगों को
जिनमें नहीं है यह याद रखने का दम,
कि कैसे भूल सकते हैं उन्हें
जिनके भरोसे चलती है जिंदगी हमारी॥

परिचय-डॉ.सोना सिंह का बसेरा मध्यप्रदेश के इंदौर में हैl संप्रति से आप देवी अहिल्या विश्वविद्यालय,इन्दौर के पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला में व्याख्याताके रूप में कार्यरत हैंl यहां विभागाध्यक्ष रही डॉ.सिंह की रचनाओं का इंदौर से दिल्ली तक की पत्रिकाओं एवं दैनिक पत्रों में समय-समय पर आलेख,कविता तथा शोध पत्रों के रूप में प्रकाशन हो चुका है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के भारतेन्दु हरिशचंद्र राष्ट्रीय पुरस्कार से आप सम्मानित (पुस्तक-विकास संचार एवं अवधारणाएँ) हैं। आपने यूनीसेफ के लिए पुस्तक `जिंदगी जिंदाबाद` का सम्पादन भी किया है। व्यवहारिक और प्रायोगिक पत्रकारिता की पक्षधर डॉ.सिंह के ४० से अधिक शोध पत्रों का प्रकाशन,२०० समीक्षा आलेख तथा ५ पुस्तकों का लेखन-प्रकाशन हुआ है। जीवन की अनुभूतियों सहित प्रेम,सौंदर्य को देखना,उन सभी को पाठकों तक पहुंचाना और अपने स्तर पर साहित्य और भाषा की सेवा करना ही आपकी लेखनी का उद्देश्य है।

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