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मनाओ अपना नूतन वर्ष

विनोद सोनगीर ‘कवि विनोद विनम्र’
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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गुड़ी पड़वा विशेष….

मन उल्लासित रंग तरंग में,चहुँदिश छाया नव उत्कर्ष,
गीत सुहाने गाए रागिनी,आया अपना नूतन वर्ष।

नव आलोक संग नवल चेतना,गूँजे वादों का मल्हार,
नई रश्मियां सूरज की लाई,गुड़ी पड़वा का त्यौहार।

सुंदर-सुंदर सुमन खिले हैं,सजे सुहाने वंदन वार,
विश्वास नया नव हर्ष लिए,मन में छाए नवल विचार।

नूतन वर्ष में नव स्वप्नों से,सजे सभी रिश्तों के तार,
अपनों के आशीष-स्नेह से,मिले सभी को खुशी अपार।

हुई बिदाई पतझड़ की भी,ऋतु वसंत की लो आई,
देखो नव श्रृंगार प्रकृति का,हर कण में मस्ती छाई।

सुख-समृद्धि,यश-कीर्ति लाए,नवल वर्ष का नव उल्लास,
घर-घर फहराए जब भगवा,करे विजय का नव आभास।

मिटे नीम-सी कड़वाहट अब,छाए गुड़-धनिए की मिठास,
पूरण हो सब मनोकामना,नव शक्ति पर हो विश्वास।

प्रकृति ने निज स्वरूप बदला,छाई है मौसमी बहार,
मीठे-मीठे पकवानों से,करे आज सब का सत्कार।

बैर मिटाए नव संवत्सर,लाया है ये शुभ संदेश,
खुशहाली सर्वत्र बिखराए,धारें हम खुशियों का वेश।

मधुर स्वरलहरियां बिखरेंगी,संग बजेंगे सारे साज,
राम राज का सपना सच हो,नव हिन्दू वर्ष मनाएं आज।

चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा,का है ये पावन अवसर।
नवल किरण सूरज की लाई, नव संवत नव संवत्सर॥

परिचय–विनोद कुमार सोनगीर का निवास मध्यप्रदेश के इन्दौर जिले में है,पर स्थाई मंडलेश्वर में है। साहित्यिक उपनाम-कवि विनोद विनम्र से पहचाने जाने वाले श्री सोनगीर की जन्म तारीख १ जुलाई १९८२ है। इनको भाषा ज्ञान-हिंदी व इंग्लिश का है। बी.एससी.(जीव विज्ञान),एम.ए.(समाज शास्त्र), एम.एस-सी.(रसायन) सहित डी.एड. और सी.टी.ई.टी. तक शिक्षित होकर कार्य क्षेत्र में शासकीय सेवक (शिक्षक)हैं। आप सामाजिक गतिविधि के अन्तर्गत पर्यावरण सुरक्षा,बालिका शिक्षा हेतु सदैव तत्पर हैं। कवि विनोद की लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल,लेख और कविता है। कईं पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाओं को स्थान मिला है। प्राप्त सम्मान तथा पुरस्कार निमित्त आपको शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु व संगठन हित में सक्रिय भूमिका हेतु कर्मचारी संगठन से सम्मान,शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा हेतु ग्राम पंचायत उमरीखेड़ा आदि से सम्मान हासिल हुए हैं। विशेष उपलब्धि-उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित होना है। लेखनी का उद्देश्य-लेखन से सभी का शुद्ध मनोरंजन करना,व समाज को नई दिशा प्रदान करना है। आपकी नजर में पसंदीदा हिंदी लेखक सभी हैं,तो प्रेरणापुंज-डॉ.राहत इंदौरी हैं। इनकी विशेषज्ञता-श्रृंगार,हास्य,व्यंग्य और वीर रस पर लेखन की है। देश और हिंदी भाषा के प्रति अपने विचार-“देश में हिंदी साहित्य के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार अत्यंत आवश्यक है। हिंदी भाषा को इंग्लिश से बचाने के लिए साहित्य का प्रसार अत्यंत आवश्यक है।” कवि विनोद के जीवन का लक्ष्य-श्रेष्ठ कार्य सतत करते रहना है।

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