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माँगता हूँ साथ तेरा ओ प्रिये

भानु शर्मा ‘रंज’
धौलपुर(राजस्थान)

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माँगता हूँ मैं शिवा से,साथ तेरा ओ प्रिये,
जिंदगी की साँस मेरी,मीत है तेरे लिये।
थाम के तू हाथ मेरा,जिंदगी की चल डगर,
मैं मुसाफिर हूँ सफर का,तुम बनो अब हमसफ़र॥
दे रहे अब शिव गवाही,सुन हमारे प्यार की,
चाँदनी भी नेह की हो,प्रीत के श्रंगार  की।
प्रेम की मूरत बनो तुम,जो बनी थी राधिका,
श्याम की मीरा बनो तुम,जो जपे बन साधिका।
राम की तुम जानकी हो,शिव की शक्ति हो प्रिये,
माँगता हूँ मैं शिवा से…॥
गा रहा हूँ मीत मेरे,प्रीत का तुम राग हो,
छू गया जो हृदय मेरा,गीत का अनुराग हो।
जिंदगी की आस में तुम,श्वांस का विश्वास हो,
रूह में तेरे समाया,प्रेम का अहसास हूँ॥
मैं किनारा तुम लहर हो,गंग तुम मैं हूँ शिवा,
कल्पना कैसे करूँ मैं,बोल ‘जाना’ तेरे सिवा।
तुम मुरलिया श्याम की हो,मैं बन गया हूँ अधर,
स्वर साधा प्रीत ने तो,तान का मधुरिम असर।
बन गया मैं राधिका हूँ,श्याम बनी हो तुम प्रिये॥
बाग तुमसे ही सुगंधित,दिल की तुम हो कली,
भाव की वो भावना भी,गोद तेरे है पली।
हृदय के मंदिर सजी है,मीत की सुंदर छवि,
रोशनी तुम बन गयी हो,मैं निहारुँ बन रवि॥
‘भानु’ की बस कामना ये,तुम बनो अर्द्धांगिनी,
शांत सौम्य चाँद बन के,चाँदनी-सी यामिनी।
सात वचन फेरे ले के,हम बनायें संसार को,
प्रीत के श्रंगार से अब,तुम सजाओ परिवार को।
प्रेम का हूँ मैं पुजारी,देविका तुम हो प्रिये,
माँगता हूँ मैं शिवा से,साथ तेरा ओ प्रिये॥
परिचय-भानु शर्मा का साहित्यिक उपनाम-रंज है। जन्म तारीख २ अक्टूबर १९९५ और जन्म स्थान-बदरिका है। वर्तमान में बदरिका,धौलपुर (राजस्थान) में ही स्थाई बसेरा है। हिंदी भाषा जानने वाले रंज की शिक्षा-जी.एन.एम. और बी.ए. (हिंदी साहित्य) है। कार्यक्षेत्र-नर्सिंग होम में नौकरी है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में भागीदारी करते हैं। सभी विधा में लेखन करते हैं। ‘काव्यांजलि'(सांझा संग्रह)सहित अन्य पत्र-पत्रिकाओं में भी करीब सौ रचना प्रकाशित हैं। इनको प्राप्त सम्मान-पुरस्कार में-छंद रत्न,युवा साहित्य सम्मान और काव्य भूषण सम्मान प्रमुख हैं। ब्लॉग पर लेखन करने वाले भानु शर्मा की विशेष उपलब्धि-काव्य सम्मान और मंच पर कविता प्रस्तुति है। लेखनी का उद्देश्य-समाज को आईना दिखाना एवं कुरीतियों को खत्म करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-मुंशी प्रेमचंद एवं प्रेरणा पुंज-रामधारी सिंह दिनकर है। विशेषज्ञता-कविता पाठन है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-हिंदी हमारी माँ है उर्दू हमारी मौसी,दोनों की रक्षा हमारी जिम्मेदारी है।