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माँ की ममता

शैलश्री आलूर ‘श्लेषा’ 
बेंगलूरु (कर्नाटक राज्य)
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वृद्धाश्रम में मौत की राह
देखती बैठी एक माँ के हाथ
बेटे का खत मिला।
पत्र सुंदर था
खत का विषय कुछ ऐसा है-
माँ कल एक तारीख है
पिताजी की पेन्शन के रूपए
आए होंगे।
आ रहा हूँ दो -तीन दिन मेें उन
रूपयों को लेने,
जानती हो न माँ घर संभालना
कितना मुश्किल है आजकल ?
माँ नहीं निभा पा रहा हूँ
रोज-रोज की झंझटों को,
तुम्हारी बहू ने नई कार की माँग
की है,कहती है पुरानी कार पुरानी हो गई।
हाँ माँ,यह आलीशान बंगला भी उसे कम ही लग रहा है,
तेरा पोता जो देखता है,
वह मांगता है,
आधा बंगला उसी के खिलौनों से भरा है।
अगले हफ्ते शादी है साली की,
वर अमेरिका से है।
बहन याद रखे,ऐसा तोहफा देने
के लिए इसने दिन
रात चौगुनी मेहनत की है।
कल ही तेरी पोती का
जन्मदिन मनाए,जानती हो
कितने लोग आए थे ?
उसके जन्मदिन का खर्चा इतना,
कि एक गरीब परिवार का सालों
का गुजारा हो जाता।
हे भगवान! सह नहीं सकता माँ,
इसलिए पिताजी का पैसा लेने आ जाऊंगा परसों।
खत को पढ़कर बूढ़ी माँ
रो पड़ी…
खत है लंबा,मगर माँ की
स्वस्थता की एक पंक्ति
के लिए जगह नहीं…
पर वह माँ है,
उसका वात्सल्य फिर से
जाग गया,
हर महीने की तरह।
बेटे की स्थिति सुनकर रोते हुए,
फिर से रूपया देने के लिए
तैयार हो जाती है वह
करुणामयी माँ॥

परिचय-शैलश्री आलूर का साहित्यिक उपनाम-श्लेषा हैl आपकी जन्मतिथि २ सितंबर तथा जन्म स्थान-बादामी हैl वर्तमान में आप देवीनगर(बेंगलूरु)में निवासरत हैं,और यही स्थाई पता भी हैl कर्नाटक राज्य की निवासी शैलश्री आलूर ने एम.ए. और बी.एड. सहित एम.फिल. तथा पी.एच-डी की शिक्षा भी हासिल की है। आपका कार्य क्षेत्र-प्रौढ़ शाला में हिंदी भाषा शिक्षिका का है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप अनेक कवि सम्मेलनों में भागीदारी करके सम्मानित हो चुकी हैं। आपकी लेखन विधा-तुकांत-अतुकांत,हाईकु,वर्ण पिरामिड,कहानी, लघुकथा,नाटक,संस्मरण,लेखन,रिपोर्ताज और गीत आदि है। आनलाइन स्पर्धा में आपको महादेवी वर्मा सम्मान(संस्मरण के लिए),प्रताप नारायण मिश्र सम्मान सहित खुर्रतुल-ए-हैदर सम्मान,मुन्शी प्रेमचंद सम्मान भी मिला हैl आप ब्लॉग पर भी कविताएं लिखती हैं। विशेष उपलब्धि एक मंच द्वारा `श्लेषा`,दूसरे मंच द्वारा `लता` उपनाम अलंकरण तथा `श्रेष्ठ समीक्षक` सम्मान मिलना है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-मन की भावनाओं को कलम का रूप देना,साहित्य के जरिए समाज में प्रगति लाने की कोशिश करना और समाज में व्याप्त समस्याओं को बिंबित करके उनका हल करना हैl