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माँ धरती

अनिल कसेर ‘उजाला’ 
राजनांदगांव(छत्तीसगढ़)
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विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष………


प्रकृति को छेड़ के क्यों कर रहा नाश,
दुनिया का ऐसे में हो जाएगा विनाश।

भौतिक साधनों से हो गया लाचार,
पर्यावरण को कर दिया दूषित और बेकार।

ना कर इंसा ऐसी नादानी,
जीवन दे के पड़ेगी कीमत चुकानी।

ना दिखा ऐसे विकास के सपने,
जिसमें खो जाये सब अपने।

माँ धरती से ना कर ऐसा व्यवहार,
हो जायेगी मानवता तार-तार।

बनाएं ना हम ऐसी परिस्थिति,
मिट जाए जिससे हमारी उपस्थिति।

ज्ञान से विज्ञान का खेलो न घिनौना खेल,
पूरी सृष्टि इससे हो जाएगी फेल।

पर्यावरण स्वच्छ तो प्रकृति का सम्मान,
मानव जाति का ऐसे बढ़ेगा मानll

परिचय-अनिल कसेर का निवास छतीसगढ़ के जिला-राजनांदगांव में है। साहित्यिक उपनाम-उजाला है। १० सितम्बर १९७६ को डोंगरगांव (राजनांदगांव)में जन्मे श्री कसेर को हिन्दी,अंग्रेजी और उर्दू भाषा आती है। शिक्षा एम.ए.(हिन्दी)तथा पीजीडीसीए है। कार्यक्षेत्र-स्वयं का व्यवसाय है। लेखन विधा-कविता,लघुकथा,गीत, ग़ज़ल है। कुछ रचनाएं पत्र-पत्रिका में प्रकाशित हो चुकी हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य-सच्चाई को उजागर करके कठिनाइयों से लड़ना और हिम्मत देने की कोशिश है। प्रेरणा पुंज-देशप्रेम व परिवार है। सबके लिए संदेश-जो भी लिखें,सच्चाई लिखें। विशेषज्ञता- बोलचाल की भाषा व सरल हिन्दी में लिखना है।