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माँ

ओमप्रकाश क्षत्रिय प्रकाश
नीमच(मध्यप्रदेश)
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मातृ दिवस स्पर्धा विशेष…………


मन और आत्मा में अंतर्द्वंद्व चल रहा था।
मन ने हल्का होने के लिए आत्मा से कहा,-“मुझे पेन मिला था। माँ से कहा,वह कुछ नहीं बोली। मैंने पेन अपने पास रख लिया,मगर जब रास्ते में माँ के साथ जा रहा था,तब मुझे कीमती आभूषण व रूपए से भरा पर्स मिला था। उसे देखकर माँ बड़ी खुश हुई,-“ऊपर वाला जब भी देता है छप्पर फाड़ कर देता है।” माँ ने यह कहते हुए उस अमानत को अपने पास रख लिया था।
“यह तो गलत बात थी। क्या,भगवान इस तरह छप्पर फाड़ कर धन देता है ?”
“मुझे क्या पता! मैं उस वक्त छोटा-सा बच्चा था। बस चीजें उठाना सीख गया,और बड़ा हुआ तो छोटे-छोटे अपराध करने लगा,मगर, मैंने उस लड़की की हत्या नहीं की हैं।”
“गले से चैन किस ने खींची थी ? उसी चैन से उस लड़की का गला कटा था और वह मर गई,” आत्मा ने जवाब दिया।
“मगर एक छोटी-सी गलती के लिए हत्या,छेड़छाड़ जैसे आरोप और जेल की सजा ? यह तो सरासर गलत व नाइंसाफी है। यदि मैं पैसेवाला होता तो जेल से छूट गया होता ? ” मन ने कहा तो आत्मा ने जवाब दिया,-“तुमने गलती तो की है। सजा तो मिलेगी ही,चाहे शारीरिक हो या मानसिक ?” तभी अँधेरी कालकोठारी में गन्दगी में पनपने वाले मच्छर ने उसके एक हाथ पर काट खाया।दूसरा हाथ तब तक उस मच्छर को मौत की सजा दे चुका था, “गलती की सजा देना तो कुदरत का भी कानून है।”
आत्मा ने कहा तो मन पश्चाताप की आग में जलते हुए बोला,-“ सजा केवल मुझे ही मिलेगी ?”
“नहीं,सभी को।”
तभी अंधेरे को चीरती हुई प्रहरी की आवाज़ आई-“राजन ! आपकी माँ मिलने आई है।” जिसे सुन कर मन चीत्कार उठा, गलत आदत सिखाने वाली मेरी माँ नहीं हो सकती है ?” और वह काल कोठरी की अँधेरी राह को चुपचाप निहारने लगा।
तभी आत्मा ने कहा,-“माँ ! माँ होती है,अन्यथा वो यहाँ नहीं आती,” और वह खामोश हो गई।

परिचय-ओमप्रकाश क्षत्रिय का निवास  मध्यप्रदेश के नीमच जिले में है। उपनाम `प्रकाश` से लेखन जगत में सक्रीय श्री क्षत्रिय पेशे से शासकीय विद्यालय में सहायक शिक्षक हैं। इनका जन्म २६ जनवरी १९६५ को हुआ है। आपने शिक्षा में योग्यता के तहत ३ बार बी.ए. और ५ विषयों में एम.ए. किया हुआ है। मध्यप्रदेश के रतनगढ़(नीमच) में बसे हुए होकर आपकी लेखन विधा-बाल कहानी,लेख,कविता तथा लघुकथा है। विशेष उपलब्धि यह है कि,२००८ में २४,२००९ में २५ व २०१० में १६ बाल कहानियों का ८ भाषाओं में प्रकाशन हो चुका है।  २०१५ में लघुकथा के क्षेत्र में सर्वोत्कृष्ट कार्य के लिए आपको जय-विजय सम्मान सहित बालाशोरी रेडी बालसाहित्य सम्मान २०१७, स्वतंत्रता सेनानी ओंकारलाल शास्त्री सम्मान-२०१७ और इंद्रदेवसिंह इंद्र बालसाहित्य सम्मान-२०१७ प्राप्त हुआ है। हिंदी के साथ ही अन्य भाषाओं से भी प्रेम करते हैं। बाल कविता संग्रह-`उड़ा आसमान में हाथी` तथा `चतुराई धरी रह गई` आदि प्रकाशित हैl