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माता

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’
धनबाद (झारखण्ड) 
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मातृ दिवस स्पर्धा विशेष…………


दुनिया में समाई जिसमें शक्ति अपार,
जिसके अंदर है असीम ममता और प्यार
कठिन परिस्थितियों में जो ना माने हार,
उसे माता कहकर पुकारता यह संसार।
माता तू है महान,तेरे बगैर फीका संसार॥

स्वर्ग बना रखी तू माँ अपना घर-संसार,
संतानों पर लुटाती रही तू अपना प्यार
सहती स्वयं दुःख पर मानतीं कभी ना हार,
इसलिए रखती माँ तू पूजा का अधिकार।
माता तू है महान,तेरे बगैर फीका संसार॥

माँ तुम हो दुनिया में देवों से अधिक महान,
नौ माह तन में रख लाई तू मुझे इस जहां
रहा सुरक्षित आँचल में व मिला मुझे ज्ञान,
अनुसरण कर माँ दुनिया में पाया सम्मान।
माता तू है महान,तुझसे है मेरा अभिमान॥

खुद भूखी रह खिलाती रही हमें खाना,
दुःख सहकर भी हमें जो सदैव सुख दे
ऐसी शक्ति माँ में ही है हमने इसे जाना,
बचपन में जब भी हम होते थे बीमार
रातभर जाग तू करती थीं मेरा उपचार।
माता तू है महान,तेरे बगैर फीका संसार॥

माँ तुम सदा मेरे आँसू मिटा देती थीं,
अपने होंठों की हँसी हमपे लुटा देती थीं
ममता भरे प्यार से गमों को हटा देतीं थीं,
मेरी खुशी हेतुु दुनिया को झुका देती थीं।
खुश देख मुझे अपने सारे गम भुला देतीं थीं॥

माँ है तू साथ तो दूर हमसे हर गम है,
तुम्हारे कदमों में मेरा स्वर्ग हरदम है
तू नहीं तो जीवन में मेरे तम ही तम है,
तुम्हारी उपस्थिति नहीं ईश्वर से कम है।
माता तू महान है तू ही मेरा अभिमान है॥

आते ही बहू के उस माता में दिखने लगे खोट,
नित्य निकालकर कमियाँ मान में करतीं चोट
भूखे रह खिलानेवाली हेतु बचती ना अब रोटी,
रह-रहकर बहू को नियत लगती उनकी खोटी
बेटा भी तो इनके कर्मों को कहाँ है समझ पाया।
वृद्धाश्रम छोड़ माँ को वह भी तो बहुत हर्षाया।

बंधु तुम उस माता की अब भी मत पूछो बात,
हृदय उनका रहता हरपल उसी बेटे के साथ
मन में रखती सदैव सर पे आशीर्वाद का हाथ,
पूत हो जाय कपूत पर माता होती न कुमाता,
हर हाल में उसे उस बेटे की मुस्कान ही भाती।
पूत हो जाय कपूत पर माता होती न कुमाता॥

कहता ‘राजू’ दुनिया के सब बेटों से,
माँ का गुणगान कम न कर होंठों से
कर्ज माँ का तुम उतार ना पाओगे कर्मों से,
रख पाओ खुश यदि सदैव माँ को तुम!
तुम्हें मिलेगा पुण्य अधिक सब धर्मों से॥

परिचय-साहित्यिक नाम `राजूराज झारखण्डी` से पहचाने जाने वाले राजू महतो का निवास झारखण्ड राज्य के जिला धनबाद स्थित गाँव- लोहापिटटी में हैl जन्मतारीख १० मई १९७६ और जन्म स्थान धनबाद हैl भाषा ज्ञान-हिन्दी का रखने वाले श्री महतो ने स्नातक सहित एलीमेंट्री एजुकेशन(डिप्लोमा)की शिक्षा प्राप्त की हैl साहित्य अलंकार की उपाधि भी हासिल हैl आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी(विद्यालय में शिक्षक) हैl सामाजिक गतिविधि में आप सामान्य जनकल्याण के कार्य करते हैंl लेखन विधा-कविता एवं लेख हैl इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को दूर करने के साथ-साथ देशभक्ति भावना को विकसित करना हैl पसंदीदा हिन्दी लेखक-प्रेमचन्द जी हैंl विशेषज्ञता-पढ़ाना एवं कविता लिखना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिंदी हमारे देश का एक अभिन्न अंग है। यह राष्ट्रभाषा के साथ-साथ हमारे देश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसका विकास हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए अति आवश्यक है।