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मित्र सदा अनमोल

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला(मध्यप्रदेश)
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मित्रता और जीवन…

भूलो बिलकुल भी नहीं,मित्र निभाता साथ।
हर मुश्किल में संग है,नहीं छोड़ता हाथ॥
नहीं छोड़ता हाथ,लड़े वो सारे जग से।
रखे छुपा सब राज़,सुपरिचित वह रग-रग से॥
मिले मित्र का साथ,खुशी से झूला झूलो।
सदा रखो आभार,मित्र को कभी न भूलो॥

भूलो ना उपकार तुम,मानो नित अहसान।
हरदम ही देते रहो,मित्रों को तुम मान॥
मित्रों को तुम मान,बताता अच्छा रस्ता।
मित्र सदा अनमोल,नहीं किंचित भी सस्ता॥
मित्र मिलें जब ख़ास,सभी को सदा कुबूलो।
सबसे बढ़कर मित्र,सत्य यह नहिं तुम भूलो॥

भूलो ना यह बात तुम,जीवन में अँधियार।
तब आता है मित्र ही,बनकर के उजियार॥
बनकर के उजियार,मित्र निज फर्ज़ निभाता।
हर दु:ख करके दूर,खुशी के नग़मे गाता॥
निभा मित्र का साथ,मूल्य को नहीं वसूलो।
मित्र सदा यशगान,बात कोई ना भूलो॥

भूलो ना तुम मित्रता,जो होती वरदान।
एकाकी इंसान का,हो जाता अवसान॥
हो जाता अवसान,मनुज तब दु:ख ही पाता।
बिना मित्र के शोक,मनुज बेहद पछताता॥
मित्र न छोड़े साथ,आज उसका दिल छू लो।
सबसे ऊपर मित्र,सत्य भाई ना भूलो॥

भूलो ना इस सार को,मित्र बड़ा उपहार।
मित्र मिले तो लें समझ,जीवन पाया सार॥
जीवन पाया सार,फूल खिलते तब उपवन।
मित्र रखे सुविचार,महकता घर और आँगन॥
पर रखना यह याद,मित्र को पहले तूलो।
तभी बढ़ाना हाथ,कभी तुम यह ना भूलो॥

भूलो ना भगवान ने,बिना रक्त संबंध।
रचकर के तो मित्रता,दिया नेह का बंध॥
दिया नेह का बंध,बिना स्वारथ के नाता।
पर है जो मज़बूत,सदा ही दृढ़ता पाता॥
पाकर साँचे मित्र,सदा धनिकों-सा फूलो।
मित्र सदा हमराज,सत्य यह कभी न भूलो॥

परिचय–प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे का वर्तमान बसेरा मंडला(मप्र) में है,जबकि स्थायी निवास ज़िला-अशोक नगर में हैL आपका जन्म १९६१ में २५ सितम्बर को ग्राम प्राणपुर(चन्देरी,ज़िला-अशोक नगर, मप्र)में हुआ हैL एम.ए.(इतिहास,प्रावीण्यताधारी), एल-एल.बी सहित पी-एच.डी.(इतिहास)तक शिक्षित डॉ. खरे शासकीय सेवा (प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष)में हैंL करीब चार दशकों में देश के पांच सौ से अधिक प्रकाशनों व विशेषांकों में दस हज़ार से अधिक रचनाएं प्रकाशित हुई हैंL गद्य-पद्य में कुल १७ कृतियां आपके खाते में हैंL साहित्यिक गतिविधि देखें तो आपकी रचनाओं का रेडियो(३८ बार), भोपाल दूरदर्शन (६ बार)सहित कई टी.वी. चैनल से प्रसारण हुआ है। ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं(विशेषांकों)का सम्पादन कर चुके डॉ. खरे सुपरिचित मंचीय हास्य-व्यंग्य  कवि तथा संयोजक,संचालक के साथ ही शोध निदेशक,विषय विशेषज्ञ और कई महाविद्यालयों में अध्ययन मंडल के सदस्य रहे हैं। आप एम.ए. की पुस्तकों के लेखक के साथ ही १२५ से अधिक कृतियों में प्राक्कथन -भूमिका का लेखन तथा २५० से अधिक कृतियों की समीक्षा का लेखन कर चुके हैंL  राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में १५० से अधिक शोध पत्रों की प्रस्तुति एवं सम्मेलनों-समारोहों में ३०० से ज्यादा व्याख्यान आदि भी आपके नाम है। सम्मान-अलंकरण-प्रशस्ति पत्र के निमित्त लगभग सभी राज्यों में ६०० से अधिक सारस्वत सम्मान-अवार्ड-अभिनंदन आपकी उपलब्धि है,जिसमें प्रमुख म.प्र. साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार(निबंध-५१० ००)है।