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मैं तो,माँ हूँ

तारा प्रजापत ‘प्रीत’
रातानाड़ा(राजस्थान) 
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मातृ दिवस स्पर्धा विशेष…………


नौ माह गर्भ के
खट्टे-मीठे
अनुभवों के साथ,
असहनीय
प्रसव पीड़ा के बाद,
जब मैंने तुझे
जन्म दिया,
अपनी गोद में लिया
क्षण भर में
भूल गयी,
सब दर्द
सब पीड़ा।
एक सुखद
अहसास,
मातृत्व का
तुमसे पाया,
तुमने माँ का
नाम दिया मुझे,
जब तुमने
मिच-मिचाकर
अपनी कोमल
आँखें खोली,
कई सपने देख डाले
मेरी आँखों ने तेरे लिये।
तेरी नन्हीं-नन्हीं
हथेलियों के स्पर्श से,
मेरी कमज़ोर
मानसिकता को
साहस मिला,
धीरे-धीरे मेरी
ममता की
ठंडी छाया तले,
तेरा बचपन
पलने लगा।
तेरा उलटना-पलटना
उठना-बैठना,
तेरा वो पहला क़दम
अंकित हो गया
मेरे मन के आँगन में,
तूने जब पहली बार
मुझे ‘मम्म’ बोला,
बता नहीं सकती
उस अहसास को।
वक़्त गुज़रता रहा
तेरे साथ-साथ,
मेरी ममता भी
बढ़ने लगी
और आज,
हर माँ की तरह
मेरा सपना भी
पूरा हुआ।
आज मेरे घर के
सूने आँगन में,
मेरी बहू ने
कुंकु भरे पांव धरे,
मंगलगीत गूंजे
वक़्त ने
करवट बदली,
बेटे-बहू के
ठहाकों के बीच,
मेरी मुस्कराहट
दबने लगी।
अब समय नहीं है,
मेरे पास बैठने का
मेरे बेटे के पास।
मुझसे पूछे बगैर
जो कहीं नहीं
जाता था,
अब कब आता है
कब जाता है,
मुझे मालूम नहीं…
जो अब तक खाया
अब मेरे खाने में
उसे वो स्वाद नहीं आता
जो मेरे मौन से
परेशान हो जाता था,
आज मेरे बोलने पर भी
उसे आपत्ति है
उसके छोटे से परिवार में
अब मैं शामिल नहीं,
बहुत बड़ा हो गया है
वो भी तो
बाप बन गया है।
धीरे-धीरे
मेरी ममता
बंजर होने लगी,
उपेक्षित-सी
जीवन व्यतीत कर रही हूँ
किसी को भी
मेरी जरूरत नहीं,
पर मेरे लिये तो
हर हाल में
तेरे लिये मेरे बेटे
दुआएं ही निकलती है,
जानते हो क्यों… ?
क्योंकि,
मैं एक माँ हूँ॥

परिचय-श्रीमती तारा प्रजापत का उपनाम ‘प्रीत’ है।आपका नाता राज्य राजस्थान के जोधपुर स्थित रातानाड़ा स्थित गायत्री विहार से है। जन्मतिथि १ जून १९५७ और जन्म स्थान-बीकानेर (राज.) ही है। स्नातक(बी.ए.) तक शिक्षित प्रीत का कार्यक्षेत्र-गृहस्थी है। कई पत्रिकाओं और दो पुस्तकों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं,तो अन्य माध्यमों में भी प्रसारित हैं। आपके लेखन का उद्देश्य पसंद का आम करना है। लेखन विधा में कविता,हाइकु,मुक्तक,ग़ज़ल रचती हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-आकाशवाणी पर कविताओं का प्रसारण होना है।