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राह मंजिल की

शरद कौरव ‘गंभीर’
 गाडरवारा (मध्यप्रदेश)

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कहना सरल करना कठिन,
मंजिल को पाने के लिए
इस दु:ख भरे संसार में भी,
सुख को पाने के लिए।

तकलीफ नतमस्तक भी हो जायें अगर तू डट गया,
समझ ले कि काल का जंजाल सर से हट गया
समय होगा वो तेरा जग को दिखाने के लिए।
कहना सरल करना कठिन,
मंजिल को पाने के लिए….॥

शिखर से घबरा गया तो तिमिर दामन थाम लेगा,
कष्ट से अगर लड़ गया तो जग तुझे सम्मान देगा
आश को संभव बना सबको दिखाने के लिए।
कहना सरल करना कठिन,
मंजिल को पाने के लिए…॥

मूक बन जब तक तुझे मंजिल कहीं दिख जाए ना,
घात से आघात से बच चल चमक दिख जाए ना
बना दे तू राह आगे आने वालों के लिए।
कहना सरल करना कठिन,
मंजिल को पाने के लिए…॥

सफल को असफल बना दे अह्म कारण है बड़ा,
जीत ले उस अह्म को जो तेरे सम्मुख हो खड़ा
इतिहास कायम कर नया तिथि ग्रंथ रचने के लिए।
कहना सरल करना कठिन,
मंजिल को पाने के लिए…।
इस दु:ख भरे संसार में भी,
सुख को पाने के लिए…॥

परिचय : शरद कौरव का उपनाम ‘गम्भीर’ है । आपकी जन्मतिथि १७ जनवरी १९९८,जन्म स्थान-नरवारा, गाडरवाड़ा(मध्यप्रदेश) है,तथा यहीं पर निवास है। वर्तमान में मध्यप्रदेश के सागर में रहते हैंl कार्यक्षेत्र शिक्षा,कवि सम्मेलन है l कृषि से आपकी स्नातक की पढ़ाई जारी है।आपकी पसंदीदा विधा-हास्य है,जबकि लेखन में ग़ज़ल अधिक लिखते हैंl श्री कौरव ब्लॉग पर भी लेखन करते हैं और कुछ पत्रों में भी रचनाएँ छपी भी हैं। आपको संस्था तिरोडी से सहित्‍यकार सम्मान तथा अन्य संस्थाओं से शब्द शक्ति सम्मान आदि प्राप्त हुए हैंl लेखन का उद्देश्य-अच्छे साहित्य का सृजन एवं हिन्दी लेखन में प्रमुख भागीदारी के साथ ही हिंदी भाषा-साहित्य को बढ़ाने में अपना सम्पूर्ण योगदान देना है।