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रूप और स्वभाव

सुबोध कुमार शर्मा 
शेरकोट(उत्तराखण्ड)

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रूप से भी अत्यधिक सम्मान है स्वभाव का,
रूप है बेकार-सा अभाव यदि इस भाव का।
रूप नश्वर है जगत में स्वभाव ही अमृत है,
नेह यदि है मनुज में,अमर उसका सत्व हैll

नेह चक्षु लब्ध हो तो कुरूप सुंदर रूप है,
नेह धन का धनिक मानव रंक ही कर भूप है।
कृष्णा ने कुब्जा में देखी विमल भक्ति-भावना,
इसीलिए तो उनके उर में हो गई अति चाहनाll

कृष्ण को कुब्जा से कितनी प्रीत थी दिखला दिया,
दी उसे भक्ति नवोढ़ा धाम निज पहुँचा दिया।
मोह-माया में डूब कर हम भटकते रहे संसार में,
भक्ति भाव ने ही हटाकर मन ईश में लगा दियाll

परिचय – सुबोध कुमार शर्मा का साहित्यिक उपनाम-सुबोध है। शेरकोट बिजनौर में १ जनवरी १९५४ में जन्मे हैं। वर्तमान और स्थाई निवास शेरकोटी गदरपुर ऊधमसिंह नगर उत्तराखण्ड है। आपकी शिक्षा एम.ए.(हिंदी-अँग्रेजी)है।  महाविद्यालय में बतौर अँग्रेजी प्रवक्ता आपका कार्यक्षेत्र है। आप साहित्यिक गतिविधि के अन्तर्गत कुछ साहित्यिक संस्थाओं के संरक्षक हैं,साथ ही काव्य गोष्ठी व कवि सम्मेलन कराते हैं। इनकी  लेखन विधा गीत एवं ग़ज़ल है। आपको काव्य प्रतिभा सम्मान व अन्य मिले हैं। श्री शर्मा के लेखन का उद्देश्य-साहित्यिक अभिरुचि है। आपके लिए प्रेरणा पुंज पूज्य पिताश्री हैं।