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लोकतंत्र, न्यायपूर्ण सिद्धांत और संयुक्त प्रतिबद्धता है स्वतंत्रता दिवस

पद्मा अग्रवाल
बैंगलोर (कर्नाटक)
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आजादी… और आज हम (१५ अगस्त विशेष)….

१५ अगस्त हमारे देश के इतिहास की सबसे भाग्यशाली और महत्वपूर्ण तारीख है। लगभग २०० साल के बाद हमारे देश भारत को अँग्रेजी हुकूमत के अत्याचार और गुलामी से इस दिन ही पूर्ण रूप से आजादी मिली थी। यह दिन सभी भारतीयों के लिये बहुत खास और सुनहरा दिन होता है। सभी देशवासियों ने खुशी से आजादी की साँस ली थी। आज भी हम सभी मिलकर १५ अगस्त के राष्ट्रीय पर्व को बहुत जोश और धूमधाम से मनाते हैं।
     ईस्ट इंडिया कंपनी ४०० साल पहले हमारे देश में व्यापार करने के उद्देश्य से आई थी, परंतु उन लोगों ने हमारे देश के लोगों की गरीबी, मजबूरियों और निर्बलताओं को परख कर अपना अधिकार जमा कर हमारे पूरे देश को अपना गुलाम बना लिया। अब अनाज, धन, जमीन किसी चीज पर हमारा अधिकार नहीं रह गया था। वह मनमाना कानून बना कर हमारे देश पर लागू करते। उन लोगों ने पूरे भारत पर अपना नियंत्रण कर लिया था। जब भी देशवासी विरोध करते, वह जनता पर अत्याचार करने से नहीं चूकते। देश में डर का माहौल बना कर वह जनता पर शासन कर रहे थे।
  इस हालत में भी हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के साहस में कोई कमी नहीं थी। उन सबके गंभीर और अथक प्रयासों के कारण हम आज आजाद देश में साँस ले रहे हैं।
अँग्रेजों ने हमारे देश को बुरी तरह से लूटा, जिसका उदाहरण ‘कोहिनूर’ हीरा है, जो आज भी उनकी रानी के ताज की शोभा बढा रहा है, परंतु हम आज भी अपनी संस्कृति की विशेषता नहीं भूले हैं और अन्य अतिथियों की तरह ही अँग्रेजों का भी स्वागत् करते हैं ।
    आजादी की इस लड़ाई में सैकड़ों ऐसे नाम हैं, जैसे- सुभाष चंद्र बोस , बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय व मंगल पांडे आदि का योगदान अतुलनीय है।
  इसमें महात्मा गाँधी का अहिंसा का सिद्धांत सबसे बड़ा प्रभावशाली हथियार बना। गाँधी जी ने समाज में प्रचलित अनेक कुप्रथाओं और कुरीतियों को हटाने के लिए पूरा प्रयास किया, जिसके कारण समाज में उनकी लोकप्रियता बढती गई।देश के सभी तबके उनके साथ जुड़ते चले गए, जिसके कारण आजादी की लड़ाई आसान हो गई।
स्वतंत्रता सेनानियों की दृढ़ शक्ति और आजादी पाने के प्रयासों  ने ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिला दी और १५ अगस्त १९४७ को अँग्रेज शासकों को भारत देश छोड़ने को मजबूर कर दिया। इसी ऐतिहासिक दिन को हम स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाते हैं।
   आजादी का यह राष्ट्रीय पर्व देश के कोने-कोने में धूमधाम से मनाया जाता है, पर स्वतंत्रता दिवस महज एक त्यौहार से कहीं अधिक है। यह स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किए गए बलिदानों की याद दिलाता है और नागरिकों के रूप में स्वतंत्रता, लोकतंत्र और एकता के मूल्यों की रक्षा करने के हमारे दायित्व को दर्शाता है। यह राष्ट्र के रूप में हमारी प्रगति पर विचार करने और अपने देश के विकास और कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवीकृत करने का दिन है। यह दिन हमें याद दिलाता है, कि स्वतंत्रता कठिन परिश्रम से प्राप्त विशेषाधिकार है जिसे कभी हल्के से नहीं लेना है।
यह हमें एक उज्जवल भविष्य के लिए काम करने को प्रेरित करता है कि प्रत्येक नागरिक राष्ट्र के विकास और समृद्धि में योगदान दे सके।
स्वतंत्रता दिवस पर पूरा देश देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो उठता है एवं लोगों को एकजुट करके एहसास दिलाता है कि हमारी अनेक भाषाओं, धर्मों और सांस्कृतिक मान्यताओं के बावजूद हम एक राष्ट्र हैं। भारत देश की शक्ति विविधता में एकता है। हम विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक गणराज्य के नागरिक होने पर गर्व महसूस करते हैं, जहाँ हर आम आदमी सत्ता का पक्षधर हो सकता है ।
   स्वतंत्रता दिवस का उत्सव हम सभी को लोकतांत्रिक, समतावादी, और न्यायपूर्ण सिद्धांतों की रक्षा के लिए हमारी संयुक्त प्रतिबद्धता की याद दिलाता है। आइए, हम सब मिलकर अपनी स्वतंत्रता का जश्न मनाएं। अपनी राष्ट्रीय यात्रा पर विचार करें और एक मजबूत, अधिक समावेशी समृद्ध भारत के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवीकृत करें।