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लोकतंत्र में मतदाता की भूमिका

शम्भूप्रसाद भट्ट `स्नेहिल’
पौड़ी(उत्तराखंड)

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कहते हैं कि “लोकतंत्रीय शासन व्यवस्था अंतर्गत मतदाता देश का भाग्य विधाता होता है।” मतदाता के मत की शक्ति का आंकलन तब अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है,जब किसी प्रत्याशी को एक-एक मत की प्राप्ति या अप्राप्ति के कारण जीत या हार का सामना करना पड़ता है। इसलिए,कहा जा सकता है कि देश का मतदाता देश की किस्मत को सुधार या बिगाड़ सकता है,क्योंकि वह अपने मत के प्रभाव से किसी योग्य व्यक्ति या देश के प्रति सच्चे मन से समर्पित राजनीतिक दल को जीत दिलाकर देश को विकास की धारा में अग्रसर कर सकता है या किसी अयोग्य प्रत्याशी या स्वार्थपरक राजनीति करने वाले दल को जीत दिलाकर देश के विकास के पहिये को रूकवा सकता है।
देश का प्रत्येक मतदाता लोकतंत्र को बनाये रखने हेतु उतना ही महत्वपूर्ण है,जितना किसी प्राणी को जीने के लिए अन्न। वर्तमान में भी इन्हीं सब विचारों को ध्यान में रखकर मतदाता को देश व समाज के प्रति अपने दायित्व को समझते हुए अपने मत का उचित प्रयोग करना होगा। अतीत के अनुभवों से स्पष्ट है कि,मतदाता ने जब-जब भी गंभीरतापूर्वक सोच-विचार के पश्चात् निर्वाचन में अपने मत का प्रयोग किया,तो निश्चित ही एक ऐसा राजनीतिक दल देश की सत्ता में सत्तासीन हुआ,जिसने देश के अंदर विकास की गंगा प्रवाहित तो की ही,साथ ही देश को विश्व के नक्शे में अत्यंत महत्वपूर्ण व सम्मानजनक स्थान भी दिलाया। इसके विपरीत जब-जब मतदाता ने अपने व्यक्तिगत क्षणिक स्वार्थ के वश होकर मत का प्रयोग किया,तो उसका खामियाजा देश-प्रदेश को कई प्रकार की विपरीत परिस्थितियों के रूप में दृष्टिगत हुआ।
अतः,मतदाताओं से अपील करने के साथ अपेक्षा करता हूँ कि,वे अपने मत का आगामी लोकसभा चुनाव में अवश्य प्रयोग करें,क्योंकि यह लोकतंत्र का महापर्व है,जिसमें हरेक मतदाता की वही अहमियत होती है, जो सैकड़ों,लाखों,करोड़ों तथा अरबों मतदाताओं की होती है। आपका एक मत लोकतंत्र के इस महायज्ञ में लोकतंत्र की सफलता के लिए दी गई महान् आहुति होगी। इसलिए,अपने मत का प्रयोग अवश्य कीजिए, लेकिन यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि कौन योग्य प्रत्याशी है अथवा कौन-सा ऐसा राजनीतिक दल है,जो सच्चे मन से देश को सुरक्षित, सुदृढ़ तथा समृद्धशाली बनाकर विकास की धारा को आगे बढ़ाने का काम कर सकती है। यह आंकलन देश व समाज हित में परम आवश्यक है। यही देश के नागरिकों की देश के प्रति सच्ची निष्ठा भी मानी जायेगी।

परिचय-शम्भूप्रसाद भट्ट का साहित्यिक उपनाम-स्नेहिल हैl जन्मतिथि-२१आषाढ़ विक्रम संवत २०१८(४ जुलाई १९६१) और जन्मस्थान ग्राम भट्टवाड़ी (रूद्रप्रयाग,उत्तराखण्ड) हैl आप वर्तमान में उफल्डा(श्रीनगर पौड़ी,उत्तराखंड) में रहते हैं,जबकि स्थाई निवास ग्राम-पोस्ट-भट्टवाड़ी (जिला रूद्रप्रयाग) हैl उत्तराखण्ड राज्य से नाता रखने वाले श्री भट्ट कला एवं विधि विषय में स्नातक होने के सात ही प्रशिक्षु कर्मकाण्ड ज्योतिषी हैंl आप राजकीय सेवा से स्वैच्छिक रुप से सेवानिवृत्त हैंl  सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत विविध साहित्यिक व सामाजिक संस्थाओं में प्रतिभागिता-सहयोगात्मक मदद करते हैंl शम्भूप्रसाद भट्ट की लेखन विधा-पद्यात्मकता तथा गद्यात्मकता के तहत सम-सामयिक लेख,समीक्षात्मक एवं शोध आलेख आदि हैl ३ पुस्तकें प्रकाशित होने के साथ ही तथा देश के अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन हुआ हैl आपको साहित्यिक-सामाजिक कार्योंं हेतु स्थानीय, राज्य, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ४० से अधिक उत्कृष्टतम सम्मान-पुरस्कार प्राप्त हुए हैंl साथ ही अलंकरणों से भी विभूषित हो चुके हैंl इनकी दृष्टि में विशेष उपलब्धि-सन्तुष्टिपूर्ण जीवन और साहित्यिक पहचान ही हैl श्री भट्ट की लेखनी का उद्देश्य-धर्म एवं आध्यात्म,वन एवं पर्यावरणीय,सम-सामयिक व्यवस्था तथा राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ ही मातृभाषा हिंदी का बेहतर प्रचार-प्रसार करना हैl