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वर्तमान परिदृश्य में प्राकृतिक इलाज आवश्यक

विनोद वर्मा आज़ाद
देपालपुर (मध्य प्रदेश) 

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भारत देश ऋषि-मुनियों की धरा रही है।सन्त-महात्माओं के चमत्कार और देवभूमि पर चमत्कारित औषधियाँ मानव जीवन के कल्याण के लिए उपयोगी रही हैं। वर्तमान समय में गर्मी तो शुरू हो ही गई है,लेकिन इसके आगे ‘लू’ का प्रकोप प्रारम्भ होगा,जो इस बार भीषण ही नहीं भीषणतम होने की संभावना है। ऐसे में बच्चों पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता रहेगी। हालांकि,इससे बचने का प्रयास बड़ों को भी करना पड़ेगा। हम इस समय मे अधिक से अधिक पानी का इस्तेमाल करें। छाछ,नीम्बू पानी,केरी का पना,फलों का रस भी स्वास्थ्यवर्धक है। उसका भी प्रतिदिन उपयोग करते रहना चाहिए और बच्चों को भी पिलाएँ। हाथ-पैर-मुँह भी अंतराल से धोते रहें। ठंडे स्थल पर समय व्यतीत करें तो ‘लू’ से बचा जा सकता है। इसके बावजूद अगर ‘लू’ लग जाये तो घबराएं नहीं।
‘लू’ की पहचान हम घर पर ही कर सकते हैं। कान की जो लटकन होती है( गांव में पपड़ी बोलते हैं),उसे हम उंगलियां लगाकर देखें ठंडी है या नहीं। अगर ठंडी हो तो समझो ‘लू’ लग गई है। पहचान के लिए यह और तरीका है कि अगर कोई व्यक्ति सुस्त है,उल्टी कर रहा है,बुखार जैसा बदन है,आँखें पूर्ण रूप से नहीं खुल पा रही है आदि-आदि। देशी औषधियां ही ऐसे मरीजों पर ज्यादा कारगर होती हैं।
यदि ‘लू’ लग जाये तो हमें यह करना चाहिए-
#प्याज लगभग सभी घरों में उपलब्ध होती है। प्याज कुचलकर उसका रस निकालकर दोनों कान में डालें,फिर हथेली,पगतलियों में रगड़ें,नाक से उस कुचले प्याज को जोर से सूंघने कों कहे। बस,२ घण्टे बाद तो वह दौड़ लगाने लगेगा। ऐसा लगेगा ही नहीं कि ‘लू’ लगी थी।
#सूती कपड़ा गीला करके पूरे शरीर पर फेरते रहें। जल,रस,पना,छाछ आदि पिलाते रहें।
#’लू’ के मरीज को जमीन पर सीधा लिटा दें। नमक(डली वाला) उसकी नाभि पर रखकर लौटा पानी भर-भरकर उस डली पर डालते रहे। ‘लू’ समाप्त हो जाएगी।

परिचय-विनोद वर्मा का साहित्यिक उपनाम-आज़ाद है। जन्म स्थान देपालपुर (जिला इंदौर,म.प्र.) है। वर्तमान में देपालपुर में ही बसे हुए हैं। श्री वर्मा ने दर्शन शास्त्र में स्नातकोत्तर सहित हिंदी साहित्य में भी स्नातकोत्तर,एल.एल.बी.,बी.टी.,वैद्य विशारद की शिक्षा प्राप्त की है,तथा फिलहाल पी.एच-डी के शोधार्थी हैं। आप देपालपुर में सरकारी विद्यालय में सहायक शिक्षक के कार्यक्षेत्र से जुड़े हुए हैं। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत साहित्यिक,सांस्कृतिक क्रीड़ा गतिविधियों के साथ समाज सेवा, स्वच्छता रैली,जल बचाओ अभियान और लोक संस्कृति सम्बंधित गतिविधियां करते हैं तो गरीब परिवार के बच्चों को शिक्षण सामग्री भेंट,निःशुल्क होम्योपैथी दवाई वितरण,वृक्षारोपण,बच्चों को विद्यालय प्रवेश कराना,गरीब बच्चों को कपड़ा वितरण,धार्मिक कार्यक्रमों में निःशुल्क छायांकन,बाहर से आए लोगों की अप्रत्यक्ष मदद,महिला भजन मण्डली के लिए भोजन आदि की व्यवस्था में भी सक्रिय रहते हैं। श्री वर्मा की लेखन विधा -कहानी,लेख,कविताएं है। कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचित कहानी,लेख ,साक्षात्कार,पत्र सम्पादक के नाम, संस्मरण तथा छायाचित्र प्रकाशित हो चुके हैं। लम्बे समय से कलम चला रहे विनोद वर्मा को द.साहित्य अकादमी(नई दिल्ली)द्वारा साहित्य लेखन-समाजसेवा पर आम्बेडकर अवार्ड सहित राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा राज्य स्तरीय आचार्य सम्मान (५००० ₹ और प्रशस्ति-पत्र), जिला कलेक्टर इंदौर द्वारा सम्मान,जिला पंचायत इंदौर द्वारा सम्मान,जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा सम्मान,भारत स्काउट गाइड जिला संघ इंदौर द्वारा अनेक बार सम्मान तथा साक्षरता अभियान के तहत नाट्य स्पर्धा में प्रथम आने पर पंचायत मंत्री द्वारा १००० ₹ पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। साथ ही पत्रिका एक्सीलेंस अवार्ड से भी सम्मानित हुए हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-एक संस्था के जरिए हिंदी भाषा विकास पर गोष्ठियां करना है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिंदी भाषा के विकास के लिए सतत सक्रिय रहना है।