कुल पृष्ठ दर्शन : 154

You are currently viewing वित्तीय क्षेत्र में डिजिटलाइजेशन आवश्यक

वित्तीय क्षेत्र में डिजिटलाइजेशन आवश्यक

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’
बीकानेर(राजस्थान)
*********************************************

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी सब तरफ सुधार के पक्षधर हैं और वे न केवल सभी क्षेत्र में प्रचलित नियमों में भी सुधार हेतु सुझाव आमन्त्रित किए हुए हैं, बल्कि सभी सरकारी रिकॉर्ड का द्रुतगति से डिजिटलाइजेशन भी करा रहे हैं, इसलिए वित्तीय क्षेत्र विशेष रूप से शेयर निवेश से सम्बन्धित कुछ सुधार हेतु सुझाव अपेक्षित हैं। बताना चाहूँगा कि जहाँ तक मैंने खोजा है भारत सरकार की किसी भी वेबसाइट पर भारत में पंजीकृत या कार्यरत कम्पनी का १९५६ से आज तक का पूरा क्रमवार आँकड़ा (डाटा) उपलब्ध नहीं है। यहाँ क्रमवार का मतलब यह है कि कम्पनी जब भी पहली बार कम्पनीज एक्ट के तहत पंजीकृत हुई, तब से आज तक उसकी क्या स्थिति है। यदि ऐसा उपलब्ध है तो, पूरा सही लिंक-पीडीएफ उपलब्ध करवाया जाए, ताकि आम, साधारण, छोटे, वरिष्ठ शेयरधारकों को अपनी समस्या हल करने में और सही कदम उठाने में सहायता मिले। अन्यथा नरेन्द्र मोदी की कार्यप्रणाली अनुसार इस विषय पर शीघ्रातिशीघ्र कार्यवाही प्रारम्भ करना सब हितधारकों के लिए उचित रहेगा।
सभी आम, साधारण, छोटे शेयरधारक, विशेषकर वरिष्ठ शेयरधारक अपने शेयर डीमेट कराना चाहते हैं, लेकिन वे ऐसा चाहकर भी अपनी अपनी समस्याओं के अलावा सरकार द्वारा बुनियादी समस्याओं पर समुचित ध्यान न देने के चलते नहीं कर पा रहे हैं। उपरोक्त श्रेणी के सभी शेयरधारक सरकार से जिन बुनियादी समस्याओं पर राहत-ध्यान दे लेने का आग्रह करते हैं, उनमें से ३ मुख्य समस्याओं को बिना किसी विलंब से उचित समाधान-हल कर राहत प्रदान करने का आग्रह करते हैं।
◾कारपोरेट कार्य मन्त्रालय के साथ ही भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की वेब में सभी कम्पनियों का नाम होना। यानि जिस नाम से सबसे पहले कम्पनी सूचीबद्ध हुई या उसे रकम उगाने की अनुमति मिली, उसी से शुरू हो। फिर उसमेंं हर प्रकार के बदलाव का भी पूरा उल्लेख हो, ताकि निवेशक को बिना ज्यादा दिक्कत के सही जानकारी मिल जाए।
सभी जानते हैं कि जब भी कोई कम्पनी बनती है तो उसको रजिस्ट्रार आफ कम्पनीज से स्वीकृति लेनी पड़ती है। अर्थात सरकार के इस विभाग में इस नई कम्पनी का सारा विवरण दर्ज हो जाता है। इसके बाद आम आदमी को अपने अंश (शेयर) बेचने के लिए सरकारी विभाग से सारे विवरण दे अनुमति प्राप्त करते हैं। अभी ऐसी अनुमति १९८८ से सेबी दे रही है, जबकि पहले कन्ट्रोलर आप कैपिटल इशूज देती थी। ऐसी काफी कम्पनियाँ हैं, जो शेयर बाजार अर्थात स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होकर असूचीबद्ध हो गई या किसी ने उसको खरीदने के बाद नई प्रतिभूति जारी की या फिर नाम बदला। इस तरह इन सबके चलते छोटे वरिष्ठ शेयरधारक परेशानी झेल रहे हैं, जिसका निवारण मन्त्रालय को करना चाहिए, अन्यथा छोटे-वरिष्ठ शेयरधारक इस तरह की परेशानियों से उबर ही नहीं पाएंगे।
आशय यही है कि, सरकार के विभागों में आज तक की सभी कम्पनी का विवरण उपलब्ध है। अर्थात १९५६ से शुरू करके सभी कम्पनियाँ आज किस परिस्थिति में है, का विवरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए, लेकिन वित्त मंत्रालय के किसी भी विभाग में यह सिलसिलेवार उपलब्ध नहीं है, जबकि डिजिटल व्यवहार तेजी से बढ़ा है।
इसके चलते सरकार के अन्य विभागों में ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌डिजिटाइजेशन का असर देखने को मिल रहा है। इसलिए उपरोक्त जानकारी वित्त विभाग के अन्तर्गत युद्ध स्तर पर सरकार को पूरा कर लेना सभी के हित में है, विशेषकर छोटे निवेशकों के साथ-साथ साधारण आम जनता के।
◾बहुत से शेयर केवल सी डी एस एल पर ही डीमेट हो सकते हैं। उसी प्रकार कुछ ऐसे भी शेयर होते हैं, जो केवल एन एस डी एल पर ही डीमेट हो सकते हैं।
आवश्यक डीमेट के चलते सभी शेयर निवेशकों का किसी एक डिपाजिटरी में तो खाता होना अनिवार्य है, जो होता भी है। इसलिए छोटे कम मूल्य वाले शेयरों को डीमेट करवाने में अतिरिक्त सालाना खर्चे के चलते डीमेट करवाना बुद्धिमत्ता नहीं।
हालांकि, सेबी ने एक बेसिक सर्विसेज डीमेट खाता की सुविधा चालू कर रखी है लेकिन यदि किसी का एन एस डी एल में डीमेट खाता है, तब सी डी एस एल में बेसिक सर्विसेज डीमेट खाता खुल नहीं सकता। इस कारण से जो शेयर केवल सी डी एस एल पर ही डीमेट हो पाएंगे, वहां यह नियम छोटे कम मूल्य वाले शेयरों को डीमेट करवाने में बाधक है। इस नियम में संशोधन अतिआवश्यक है।
◾सरकार ने पैन वगैरह लिंक न होने पर शेयरों को आईपीएफ में स्थानांतरण की चेतावनी जारी कर रखी है, जबकि लाभांश २ साल तक का बकाया रह जाने पर लाभांश के साथ साथ शेयर आईपीएफ में स्थानांतरण करना चालू कर रखा है। इन दोनों बिन्दुओं पर निवेशक चाहते हुए भी लाचार हैं। सरकार से यही निवेदन कि सभी निवेशकों से आग्रह कर भौतिक शेयर जमा करा कर उनके बदले में उन्हें म्यूचूअल फंड की तरह होल्डिंग पत्र जारी कर दें और पत्र के अन्त में डीमेट में जमा देने हेतु कॉलम हो, जिसे आवश्यकता पड़ने पर (कालान्तर में) हस्ताक्षर कर डीमेट करवाया जा सके। इस प्रक्रिया से बहुत ज्यादा मात्रा में भौतिक शेयर वापस हो जाएंगे और सभी के पैन वगैरह की सारी जानकारी भी सरकार के पास आ जाएगी।
आज तक आम, साधारण, छोटे, वरिष्ठ शेयरधारकों ने हमेशा अपनी बचत को ३ कारणों से शेयरों में लगाया।
⚫सभी सरकारें कहिए या सभी विशेषज्ञ यही सन्देश देते रहे हैं कि, शेयर निवेश का मतलब है अप्रत्यक्ष रुप से राष्ट्र निर्माण में सहयोग, इसलिए स्वर्ण या भूमि में निवेश का सोचा ही नहीं।
⚫हममें से जो भी गैरसरकारी संस्थानों में नौकरी कर बचत करते थे, तो उद्देश्य यही रहता कि हमें पेन्शन तो मिलनी नहीं है। अतः बुढापे के लिए शेयर निवेश सब हिसाब से लाभप्रद रहेगा, साथ में पहला राष्ट्र निर्माण भी पूरा होता रहेगा और आने वाले समय में हमें हमारी आवश्यकता की पूर्ति इस शेयर निवेश से होती रहेगी, इसका विश्वास भी था।
⚫सोच-समझकर शेयरों मेंं किया गया निवेश जोखिम मुक्त माना जाता रहा है, साथ ही आसानी से कर सकने वाला भी। इसके अलावा सभी सरकार शेयर निवेश को बढावा देने के लिए लगातार न केवल प्रोत्साहित करती रही, बल्कि इसमें गिरावट न हो, इस ओर हमेशा सकारात्मक कदम उठाए हैं।
आज ५०-६० साल तक निवेशित रहने के बाद यानि समय-समय पर अपनी कमाई अनुसार कर चुकाने के बाद जो भी बचत शेयरों में लगाई, अब वही वापस कर दायरे में आती है तो मन में चोट लगती है।

विश्वास है कि, सरकार सभी तथ्यों पर गौर कर, ठीक से पहल कर साधारण, छोटे, वरिष्ठ शेयरधारकों को यथाशीघ्र उचित राहत देगी।

Leave a Reply