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विरासत संजोने की जरूरत

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष………


धरोहरें विश्व और देश की ऐसी विरासत हैं,जिनको देखने से हमें पूर्व के स्थापित समाज की जानकारी मिलती हैl इससे तत्समय की जानकारी मिलती हैl विश्व धरोहर दिवस दुनियाभर में हर साल १८ अप्रैल को मनाया जाने वाला एक वार्षिक कार्यक्रम और उत्सव है। इसका उद्देश्य मानव विरासत को संरक्षित करना और क्षेत्र के सभी प्रासंगिक संगठनों के प्रयासों को पहचानना है।
१९८२ में (आईसीओएमओएस) ने यूनेस्को की महासभा द्वारा अनुमोदित विश्व धरोहर दिवस के रूप में 18 अप्रैल को घोषणा की,ताकि मानव जाति की सांस्कृतिक विरासत के महत्व के बारे में लोगों की जागरूकता बढ़े,साथ ही इसके उद्देश्य से मानव विरासत की रक्षा और संरक्षण करने के मुख्य कारण को लोग समझ सकें।
विश्व विरासत दिवस पूरे विश्व में हमारे देश की मूल्यवान संपत्ति और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा और संरक्षण हेतु तथा आम जनता के बीच जागरूकता पैदा करने के लिये प्रत्येक वर्ष १८ अप्रैल को मनाया जाता है। पूरी दुनिया में रोज़ाना लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाते हैं। बस अपने जीवन के बारे में कहते हैं,कि वे कौन हैं और वे कहां से आये हैं,लेकिन मानव जाति के संयुक्त इतिहास और विरासत का जश्न मनाने के लिये एक वर्ष में एक दिन अलग किया गया है। विश्व धरोहर दिवस हमें सभी संसार संस्कृतियों का जश्न मनाने और महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्मारकों और स्थल पर जागरूकता लाने और दुनिया की संस्कृतियों को संरक्षित करने के महत्व को आगे बढ़ाने के लिये प्रोत्साहित करता है। १८ अप्रैल १९८२ को ट्यूनीशिया में इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ मोनुमेंट्स एंड साइट्स द्वारा पहला विश्व विरासत दिवस मनाया गया था। वर्ष १९८३ में संयुक्त राष्ट्र की संस्था युनेस्को ने इसे मान्यता प्रदान की। इससे पहले प्रत्येक वर्ष १८ अप्रैल को विश्व पुरातत्व स्थल और स्मारक दिवस के रुप में मनाया जाता था। इन मूल्यवान स्थानों की रक्षा के लिये एक संगठन की स्थापना की गई थी और इसमें सैकड़ों संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ वहां एकसाथ आयेl इनमें आर्किटेक्ट, इंजीनियर,भूगोलकार,सिविल इंजीनियर,कलाकार और पुरातत्वविद शामिल थे। प्रत्येक वर्ष वे यह सुनिश्चित करने में मदद के लिये काम करते हैं,जिससे दुनिया के कुछ सबसे खूबसूरत स्थल और महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्मारक भविष्य की पीढ़ियों के लिये संरक्षित रहें।
इसमें दुनियाभर में १५० से अधिक देशों में लगभग १० हजार सदस्यों को शामिल किया गया है। इन सदस्यों में से ४०० से अधिक सदस्य संस्थानों,राष्ट्रीय समितियों और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समितियों के सदस्य हैं। यह सभी महत्वपूर्ण स्थल को बचाने और उनकी पहचान करने के लिये मिलकर काम करते हैं।
२०१६ में ब्रिटेन में गोरहम के गुफा परिसर को भारत में खांगचेन्ज़ोंगा राष्ट्रीय उद्यान और ईरान गणराज्य में फारसी कानाट को संरक्षित किया गया। यह अपने सदस्यों और नेतृत्व के अथक प्रयासों के माध्यम से संभव हुआ है। इन स्थानों को भविष्य की पीढ़ियों के लिये संरक्षित किया जायेगा। दार अल उलूम विश्वविद्यालय सऊदी सोसाइटी ऑफ रियल की भागीदारी के साथ राष्ट्रीय शहरी विरासत केन्द्र द्वारा प्रतिनिधित्व एससीटीएच द्वारा आयोजित विरासत और अतीत का एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करके सऊदी अरब ने २०१३ में पहली बार विश्व धरोहर दिवस मनाया था।

परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।