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वृतिका

कपिल कुमार जैन 
भीलवाड़ा(राजस्थान)
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आज
शाम को द्वार पे विदा कर के,
ज्यों ही रात्रि के आरम्भ में
मैं चांद के आगोश में समाया,
थकान से बोझिल पलकों ने
मुझे मेरी ‘वृतिका’ से मिलवाया,
ख़्वाब में आई एक मूरत
कुछ जानी कुछ अनजानी-सी,
कुछ सकुचाई
फिर धीरे से मुस्कुराई,
आप कौन ?
इस सवाल ने तोड़ा मेरा मौन,
समय की निर्बाध धारा में
जीवन की आपाधापी में
छूटे जो पल,
यादों की ख्वाबगाह में
मैं हूँ उन ही पलों की शेष,
जो फिर हुआ शब्दों में जीवंत
बनाने तुम्हारी रचनाओं को अनंत,
ख़्वाब में हुई थी
प्रतीत जो अवधारणा,
यथार्थ में बनी वह मेरी प्रेरणा…।

परिचय-कपिल कुमार जैन की जन्म तारीख १२ जनवरी १९८८ और जन्म स्थान-टोडारायसिंह(टोंक)है। वर्तमान में राजस्थान राज्य के भीलवाड़ा में स्थाई रुप से बसे हुए हैं। श्री जैन को भाषा ज्ञान-हिन्दी,इंग्लिश,संस्कृत एवं मारवाड़ी का है। राजस्थान वासी कपिल जैन ने स्नातक(वाणिज्य) की शिक्षा प्राप्त की है। इनका कार्यक्षेत्र- नौकरी(खरीदी प्रबंधक)है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत संस्था से जुड़े होकर समाजसेवा करते हैं। लेखन विधा-काव्य (अतुकांत कविता)है। प्रकाशन के तौर पर किताब(कवि हम तुम)आ चुकी है तो ऑनलाइन पत्रिका में रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। आपको लेखन के लिए प्रकाशन से सम्मान-पत्र मिल चुके हैं। श्री जैन की लेखनी का उद्देश्य-आत्म सन्तुष्टि है। इनके पसंदीदा लेखक-मुंशी प्रेमचंद,पाब्लो नेरूदा,ओशो तथा दिनकर विशेष हैं। प्रेरणा पुंज-ओशो हैं। इनकी विशेषज्ञता-अतुकांत कविता लेखन में है।