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शिक्षिका का मातृत्व रूप

डॉ.पूर्णिमा मंडलोई
इंदौर(मध्यप्रदेश)

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मातृ दिवस स्पर्धा विशेष…………

रोज सुबह चाय का प्याला लेकर अखबार पढ़ना प्रतिभा की आदत है। आज भी रोज की तरह अखबार पढ़ने बैठी ही थी,कि दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी। वह उठकर दरवाजे तक गई,तो देखा एक व्यक्ति फूलों का गुलदस्ता लिए खड़ा है। प्रतिभा को देखते ही बोला-“मैडम ये आपके लिए सर ने भेजा है।” और वह फूल देकर चला गया। कौन हो सकता है ?, किसने भेजे होंगे ये फूल ?,आज तो मेरा जन्मदिन भी नहीं है ? कुछ ही पलों मे ये सभी प्रश्न प्रतिभा के मन में उठने लगे। अन्दर आकर देखा गुलदस्ते में एक कार्ड लगा हुआ था। उस पर लिखा था,-“चरण स्पर्श माँ-आपका बेटा आशीष।” ये देख कर प्रतिभा की खुशी आँखों से छलक गई। उसे याद आया,आज तो ‘मदर्स डे’ है,इसिलिए आशीष ने ये फूल भेजे हैं।
आशीष को प्रतिभा ने स्कूल में कक्षा १२वीं तक पढ़ाया था। वह विज्ञान विषय के साथ-साथ बच्चों को कभी कभी विषय से हट कर भी शिक्षा दिया करती थी। नैतिक शिक्षा, संस्कार,बड़ों से व्यवहार आदि के बारे में बच्चों को बताया करती थी। प्रतिभा अपने छात्रों से मित्रवत व्यवहार करती थी। उसके इस प्रकार के अध्यापन कार्य एवं व्यवहार से सभी बच्चों को प्रतिभा से बहुत लगाव था। आशीष भी अपनी प्रिय मैडम से बहुत प्रभावित हुआ था एवं अपनी शिक्षिका की बातों का उस पर बहुत गहरा असर हुआ था।
प्रतिभा को आज भी याद है,बरसों पुरानी बात ,कि कैसे अचानक आशीष ने घर आकर प्रतिभा को अपनी पहली कमाई से एक मोबाईल उपहार में दिया था। प्रतिभा ने बहुत मना किया था, कि मैं अपने छात्रों से इतने महंगे उपहार नहीं लेती। ये मेरे सिद्धांतों के विरुद्ध है, परन्तु आशीष नहीं माना था। उसने कहा था, -” आपने मुझे इतनी अच्छी शिक्षा दी है,आज मैं जो भी हूँ वो आपकी दी हुई सीख का ही परिणाम है। आप तो मेरी माँ है,और बेटे की पहली कमाई पर माँ का अधिकार होता है।” कहते-कहते थोड़ा रुका,फिर बोला-“मुझे हमेशा यही मलाल रहेगा कि,मैंने आपके घर जन्म क्यों नहीं लिया!” आशीष बोल रहा था,वह सिर्फ सुनती जा रही थी। गला भर आया था। कुछ बोल नहीं पाई थी। बस उठकर आशीष को गले लगा लिया था।
फूलों को देख कर सोच रही थी,दिन को महीनों और महीनों को साल में बदलते देर कहाँ लगती है,मगर आज भी हर साल ‘मातृ दिवस’ पर फूल आते हैं,और वह अपनी पत्नी और बच्ची के साथ आशीर्वाद लेने जरूर आता है।

परिचय-डॉ.पूर्णिमा मण्डलोई का जन्म १० जून १९६७ को हुआ है। आपने एम.एस.सी.(प्राणी शास्त्र),एम.ए.(हिन्दी), एम.एड. करने के बाद पी.एच-डी. की उपाधि(शिक्षा) प्राप्त की है। वर्तमान में डॉ.मण्डलोई मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित सुखलिया में निवासरत हैं। आपने १९९२ से शिक्षा विभाग में व्याख्याता के पद पर लगातार अध्यापन कार्य करते हुए विद्यार्थियों को पाठय सहगामी गतिविधियों में मार्गदर्शन देकर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाई है। विज्ञान विषय पर अनेक कार्यशाला-प्रतियोगिताओं में सहभागिता करके पुरस्कार प्राप्त किए हैं। २०१० में राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान(जबलपुर) एवं मध्यप्रदेश विज्ञान परिषद(भोपाल) द्वारा विज्ञान नवाचार पुरस्कार एवं २५ हजार की राशि से आपको सम्मानित किया गया हैl वर्तमान में आप जिला शिक्षा केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर सहायक परियोजना समन्वयक के रुप में सेवाएं दे रही हैंl कई वर्ष से लेखन कार्य के चलते विद्यालय सहित अन्य तथा शोध संबधी पत्र-पत्रिकाओं में लेख एवं कविता प्रकाशित हो रहे हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य अपने लेखन कार्य से समाज में जन-जन तक अपनी बात को पहुंचाकर परिवर्तन लाना है।