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समय रहते सम्भल जाओ

जसवंतलाल खटीक
राजसमन्द(राजस्थान)
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मुझको लगते हैं प्यारे,
वन्यजीव देखो हमारे।
अब इनको बचाना है,
बचेंगे तभी वन हमारे॥

क्यों लगाते हो आग वन में,
क्यों पहुँचाते हो नुकसान।
पर्यावरण सरंक्षण के लिए,
बनाओ इनको भी अभियान॥

लुप्त हो रही है प्रजातियां,
सब अपने मोह और लालच में।
समय रहते सम्भल जाओ,
एक जीव नहीं बचेगा कानन में॥

कभी नहीं करेंगे वार,
जीव-जन्तुओं से करो प्यार।
मनुष्य और जीव-जंतु का साथ,
फिर हो जायेगा धरती का सुधार॥

जीव-जंतुओं को बचाने का,
एक ऐसा अभियान चलाएंगे।
इन प्यारे वन्यजीवों पर,
हम सब मिलकर दया दिखाएंगे॥

धरती पर हो रहे प्रदूषण को,
धीरे-धीरे खत्म करेंगे।
पर्यावरण सरंक्षण होगा और,
वन्यजीव विचरण करेंगे॥

अगर इन्हें बचाना है तो,
पेड़-पौधों को मत काटो।
जंगल में रहने दो इनको,
इनके घर को मत बाँटो॥

आओ सब मिल प्रण लें,
करें वन और जीव की रक्षा।
देखना इसी से हो जाएगी,
हमारी प्यारी धरती की सुरक्षा॥

वन और जीव को बचाना है तो,
प्रदूषण को जड़ से मिटाओ।
करे विनती ‘जसवंत’ सबसे ,
दो-दो पेड़ सब जन लगाओ।
दो-दो पेड़ सब जन लगाओ ॥

परिचय-जसवंतलाल बोलीवाल (खटीक) की शिक्षा बी.टेक.(सी.एस.)है। आपका व्यवसाय किराना दुकान है। निवास गाँव-रतना का गुड़ा(जिला-राजसमन्द, राजस्थान)में है। काव्य गोष्ठी मंच-राजसमन्द से जुड़े हुए श्री खटीक पेशे से सॉफ्टवेयर अभियंता होकर कुछ साल तक उदयपुर में निजी संस्थान में सूचना तकनीकी प्रबंधक के पद पर कार्यरत रहे हैं। कुछ समय पहले ही आपने शौक से लेखन शुरू किया,और अब तक ६५ से ज्यादा कविता लिख ली हैं। हिंदी और राजस्थानी भाषा में रचनाएँ लिखते हैं। समसामयिक और वर्तमान परिस्थियों पर लिखने का शौक है। समय-समय पर समाजसेवा के अंतर्गत विद्यालय में बच्चों की मदद करता रहते हैं। इनकी रचनाएं कई पत्र-पत्रिकाओं में छपी हैं।

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