रचना पर कुल आगंतुक :185

सितमगर भी वहीं रहता है

संजय गुप्ता  ‘देवेश’ 
उदयपुर(राजस्थान)

********************************************************************

क्यूँ मेरे दिल में एक दर्द-सा रहता है,
लगे ऐसे कुछ तो चुभा-सा रहता हैl
नश्तर वालों से सुधरे ताल्लुकात मेरे,
ये तो किसी अपने का काम लगता है।

नफरत भरके दिल में मुस्कराते हैं वो,
सलाम का उनका ये अंदाज रहता हैl
खेलते हैं जो आवाम की हसरतों से,
सर पर उनके ही यहाँ ताज रहता है।

मैं नासमझ चला,राह-ए-सकून पे,
किसे पता सितमगर भी वहीं रहता हैl
किसकी सुनूं और किसको सुनाऊं,
हर बेपढ़ा भी यहाँ अलीम लगता हैl

आजमाईशों से देवेश आ गया आजिज़,
अब कहाँ आदिल ढूँढे से मिलता हैll
(इक दृष्टि यहाँ भी:अलीम=पढ़ा-लिखा,आजिज़=परेशान,आदिल=न्याय करने वाला)

परिचय-संजय गुप्ता साहित्यिक दुनिया में उपनाम ‘देवेश’ से जाने जाते हैं। जन्म तारीख ३० जनवरी १९६३ और जन्म स्थान-उदयपुर(राजस्थान)है। वर्तमान में उदयपुर में ही स्थाई निवास है। अभियांत्रिकी में स्नातक श्री गुप्ता का कार्यक्षेत्र ताँबा संस्थान रहा (सेवानिवृत्त)है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप समाज के कार्यों में हिस्सा लेने के साथ ही गैर शासकीय संगठन से भी जुड़े हैं। लेखन विधा-कविता,मुक्तक एवं कहानी है। देवेश की रचनाओं का प्रकाशन संस्थान की पत्रिका में हुआ है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-जिंदगी के ५५ सालों के अनुभवों को लेखन के माध्यम से हिंदी भाषा में बौद्धिक लोगों हेतु प्रस्तुत करना है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-तुलसीदास,कालिदास,प्रेमचंद और गुलजार हैं। समसामयिक विषयों पर कविता से विश्लेषण में आपकी  विशेषज्ञता है। ऐसे ही भाषा ज्ञानहिंदी तथा आंगल का है। इनकी रुचि-पठन एवं लेखन में है।

Leave a Reply