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सूचना प्रौद्योगिकी ने नागरी लिपि और हिंदी भाषा को विस्तारित किया-डॉ. पाल

नई दिल्ली।

भारत सरकार के कार्यालयों में प्रायः देखा जाता है कि सरकारी कामकाज क्लिष्ट भाषा में किया जाता है, जिससे कर्मियों में हिंदी के प्रति अरुचि पैदा होने लगती है। यदि सरकारी कामकाज आम बोलचाल की भाषा में होने लगे तो इससे हिंदी भाषा और नागरी लिपि की लोकप्रियता बढ़ने लगेगी। सूचना प्रौद्योगिकी ने नागरी लिपि और हिंदी भाषा के कार्यान्वयन में बहुत बड़ी मदद की है। इसके प्रयोग से कार्यालयों में हिंदी में काम आसानी से किया जा सकता है। बस इसके लिए उच्च अधिकारियों की पहल और दृढ़ इच्छाशक्ति होनी चाहिए।
     उक्त विचार प्रख्यात साहित्यकार और नागरी लिपि परिषद के महामंत्री डॉ. हरिसिंह पाल ने भारत सरकार के शहरी एवं आवासन मंत्रालय के अधीन कार्यरत केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (रामकृष्णपुरम, नई दिल्ली) के कार्यालय में हुई हिंदी कार्यशाला में मुख्य वक्ता एवं विशेषज्ञ के रूप में व्यक्त किए। अधीक्षण अभियन्ता सुरेश कुमार सिन्हा ने पुष्प गुच्छ भेंट कर डॉ. पाल का स्वागत किया। हिंदी अधिकारी स्वाति तिवारी ने डॉ. पाल का परिचय दिया।
   डॉ. पाल ने राजभाषा हिंदी की संवैधानिक स्थिति, पारिभाषिक शब्दावली एवं आलेखन के विभिन्न रूपों पर विस्तार से चर्चा की और हिंदी के प्रयोग में आ रही कठिनाइयों का समाधान प्रस्तुत किया।
  कार्यशाला संयोजक श्रीमती तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।