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स्वामी जी जग संदेश

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’
बेंगलुरु (कर्नाटक)

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‘युवा दिवस’ शुभकामना, युवाशक्ति नव देश।
विवेकानन्द स्मृति दिवस, कर्मयोग संदेश॥

विश्व चमन में था खिला, ज्ञान पुष्प मकरन्द।
प्रमुदित पा माँ भारती, पूत विवेकानन्द॥

राष्ट्रधर्म नैतिक प्रथम, सद्विवेक मतिमान।
विवेकानंद श्रद्धाञ्जलि, शान्ति प्रेम सम्मान॥

चले कर्मपथ प्रीति रथ, विश्व विजय था ध्येय।
स्वामी जी संदेश जग, आस्तिकता हो गेय॥

स्वामी जी अभिलाष मन, मानवता हो धर्म।
धर्म-जाति दुर्भाव बिन, बढ़े राष्ट्र सत्कर्म॥

स्नेह सुधा भावन हृदय, जीवन हो परमार्थ।
युवा वृन्द सत्कर्म रत, बढ़ें राह पुरुषार्थ॥

शंखनाद निज अस्मिता, किया ज्ञान जयघोष।
स्वामी जी अभिव्यक्ति सुन, उड़े शिकागो होश॥

हो परहित सौहार्द्र मन, दीन रहित हो देश।
राष्ट्र शक्ति मन भक्ति हो, एक राष्ट्र संदेश॥

निर्माणक होते भविष्य, युवा राष्ट्र वरदान।
बनें नीति शिक्षण पथी, नव सर्जक अरमान॥

पर, स्वतंत्र माँ भारती, सिसक रही क्यों आज।
देख युवा अभिव्यक्ति को, देशद्रोह आग़ाज॥

ऋणी राष्ट्र करता नमन, स्वामी विवेकानन्द।
शान्ति सुखद समृद्धि बन, खिले युवा मकरन्द॥

रामकृष्ण गुरु शिष्य बन, युवाशक्ति प्रतिरूप।
बने युवा आभा सतत, बाल जरा अरु भूप॥

नमन करे कवि कामिनी, दे श्रद्धा सम्मान।
स्वामी जी गाथा विजय, गाए मन अभिमान॥

परिचय-डॉ.राम कुमार झा का साहित्यिक उपनाम ‘निकुंज’ है। १४ जुलाई १९६६ को दरभंगा में जन्मे डॉ. झा का वर्तमान निवास बेंगलुरु (कर्नाटक)में,जबकि स्थाई पता-दिल्ली स्थित एन.सी.आर.(गाज़ियाबाद)है। हिन्दी,संस्कृत,अंग्रेजी,मैथिली,बंगला, नेपाली,असमिया,भोजपुरी एवं डोगरी आदि भाषाओं का ज्ञान रखने वाले श्री झा का संबंध शहर लोनी(गाजि़याबाद उत्तर प्रदेश)से है। शिक्षा एम.ए.(हिन्दी, संस्कृत,इतिहास),बी.एड.,एल.एल.बी., पीएच-डी. और जे.आर.एफ. है। आपका कार्यक्षेत्र-वरिष्ठ अध्यापक (मल्लेश्वरम्,बेंगलूरु) का है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप हिंंदी भाषा के प्रसार-प्रचार में ५० से अधिक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक सामाजिक सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़कर सक्रिय हैं। लेखन विधा-मुक्तक,छन्दबद्ध काव्य,कथा,गीत,लेख ,ग़ज़ल और समालोचना है। प्रकाशन में डॉ.झा के खाते में काव्य संग्रह,दोहा मुक्तावली,कराहती संवेदनाएँ(शीघ्र ही)प्रस्तावित हैं,तो संस्कृत में महाभारते अंतर्राष्ट्रीय-सम्बन्धः कूटनीतिश्च(समालोचनात्मक ग्रन्थ) एवं सूक्ति-नवनीतम् भी आने वाली है। विभिन्न अखबारों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हैं। विशेष उपलब्धि-साहित्यिक संस्था का व्यवस्थापक सदस्य,मानद कवि से अलंकृत और एक संस्था का पूर्व महासचिव होना है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी साहित्य का विशेषकर अहिन्दी भाषा भाषियों में लेखन माध्यम से प्रचार-प्रसार सह सेवा करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ है। प्रेरणा पुंज- वैयाकरण झा(सह कवि स्व.पं. शिवशंकर झा)और डॉ.भगवतीचरण मिश्र है। आपकी विशेषज्ञता दोहा लेखन,मुक्तक काव्य और समालोचन सह रंगकर्मी की है। देश और हिन्दी भाषा के प्रति आपके विचार(दोहा)-
स्वभाषा सम्मान बढ़े,देश-भक्ति अभिमान।
जिसने दी है जिंदगी,बढ़ा शान दूँ जान॥ 
ऋण चुका मैं धन्य बनूँ,जो दी भाषा ज्ञान।
हिन्दी मेरी रूह है,जो भारत पहचान॥