Visitors Views 19

हर विधा में परिपूर्ण है ‘काव्यांजलि’

आरती सिंह ‘प्रियदर्शिनी’
गोरखपुर(उत्तरप्रदेश)
*****************************************************************************************

पुस्तक समीक्षा………………..
वर्तमान अंकुर प्रकाशन के अंतर्गत साझा काव्य संग्रह की श्रृंखला में ‘काव्यांजलि’ हर प्रकार की विधाओं से परिपूर्ण एक खूबसूरत संग्रह है। इस संग्रह का संपादन निर्मेश त्यागी ने किया है। १२ कवियों की रचनाओं से परिपूर्ण यह काव्य संग्रह पाठकों को आकर्षित करता है।
हरियाणा के देशपाल राघव ने अपनी कविताओं के माध्यम से अपने आसपास एवं समाज में व्याप्त व्याधियों को अंतर्मन से महसूस किया है। उनकी ग़ज़ल एवं दोहे अत्यंत सराहनीय हैं।


“…..ख्वाब कैसे सजाए रहा रातभर,
यूं ही खुद को जगाए रहा रातभर….”
उत्तर प्रदेश से गृह संचालिका किरण मिश्रा स्वयंसिद्धा की कविताओं में प्रेम का भाव अपने चरम पर है। उनकी कविता मन दिया ना जले तथा स्त्रियों से फ्रेम होती है अत्यंत खूबसूरत है
“रामायण की चौपाई-सी सरल
हाँ,स्त्रियां सिर्फ प्रेम होती है”
बिहार की शुभ्रा झा अपनी कविताओं में जीवन का यथार्थ लिखती हैं।
“हर तरफ बिखरे थे कण-कण,दर्द से सिल गया था अब मन
चारों दिशा छाया अंधेरा,आया ऐसा समय का फेरा”
पंजाब की पुष्पीन्दर चुगती भंडारी ने कुछ पौराणिक स्त्री पात्रों की मनोदशा को महसूस करके उसे शब्दों में ढालने का प्रयास किया है जो सराहनीय है। उन्होंने मांडवी के मनोभाव को कुछ इस प्रकार व्यक्त किया है-
” हाशिए पर खड़े रहकर मैंने गुजारा अपना पूरा यौवन..
जाने किस तरह की कलम से लिख दिए थे मेरे लेख विधाता ने….”
दिल्ली की अमिता गुप्ता ने जीवन के सुख-दु:ख का अमृत कलश जी भरकर छलकाया है।
“अपनी जिंदगी सिर्फ एक कहानी नहीं …..क्योंकि जीवन एक टापू नहीं…”
कई विधाओं पर कलम चलातीं हरियाणा की हिंदी प्रवक्ता शशि रंजना शर्मा ‘गीत’ की ग़ज़लें प्रेमरस से परिपूर्ण हैं-
” दीवाना हूँ बहारों का यह समझो तुम
कली का हूँ पुजारी गुल बुलाओ मत…”
ग़ज़ल लेखन में विशिष्ट स्थान रखने वाली दिल्ली की कश्मीरा त्रिपाठी के प्रत्येक अशआर काबिले तारीफ हैं-
“अंधेरी राह में चलते रहे दूर तलक,
रूह में रोशनी का एक दिया जलाना था”
दिल्ली के वरिष्ठ कवि चंद्र कोहली ने अपनी कविताओं में स्त्री को विशेष प्रेम एवं सम्मान से नवाजा है। अपनी पत्नी के लिए लिखे उनके शब्द दिल को छू जाते हैं-
“कभी सुलझाओ उलझे बालों को …..
कभी कुछ लगाओ अपने गालों को।”
बाराबंकी(उत्तर प्रदेश) के प्रणव भास्कर तिवारी ने बेहद कम उम्र में ही काव्य की कई विधाओं में महारत हासिल कर रखी है। दोहे सवैया छंद इत्यादि के शब्द अत्यंत मधुर हैं-
“उपवन में चंपा खिली,फूली केसर क्यार
पिउ-पिउ करें पपीहरा शिववीर हिया हार”
सीतापुर(उत्तर प्रदेश) से सहायक अध्यापक विशाल रस्तोगी ‘विशु’ की कविताओं में जीवन के प्रति जोश,उत्साह एवं क्रांति स्पष्ट परिलक्षित होती है-
“आँख के हर आँसू को खुद ही पोंछ लेना सीख ले तू,
हर परीक्षा की घड़ी को मुस्कुरा कर जीत ले तू”
नागपुर के प्रदीप सहारे की कविताओं में रोजमर्रा के जीवन की छोटी-छोटी बातें भी बड़ी खूबसूरती के साथ कहीं गई है-
“दादाजी लेकर जाते बाजार एक आना,… लेकर आते एक माह का किराना ..”
दिल्ली के देवेंद्र कुमार शर्मा ने अपनी कविताओं में प्रेम के विभिन्न पहलुओं का चित्रण किया है जो अतुलनीय है-
“दूसरों की राह चल मंजिल नहीं मिल पाएगी,
रेत पर आखिर में कदमों के निशान कब तक रहे।”
यह संग्रह विभिन्न रचनाकारों के अलग-अलग मनोभावों को दर्शाने का एक खूबसूरत प्रयास है,जो पाठकों को अवश्य पसंद आएगा।

परिचय-आरती सिंह का साहित्यिक उपनाम-प्रियदर्शिनी हैl १५ फरवरी १९८१ को मुजफ्फरपुर में जन्मीं हैंl वर्तमान में गोरखपुर(उ.प्र.) में निवास है,तथा स्थाई पता भी यही हैl  आपको हिन्दी भाषा का ज्ञान हैl इनकी पूर्ण शिक्षा-स्नातकोत्तर(हिंदी) एवं रचनात्मक लेखन में डिप्लोमा हैl कार्यक्षेत्र-गृहिणी का हैl आरती सिंह की लेखन विधा-कहानी एवं निबंध हैl विविध प्रादेशिक-राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में इनकी कलम को स्थान मिला हैl प्रियदर्शिनी को `आनलाईन कविजयी सम्मेलन` में पुरस्कार प्राप्त हुआ है तो कहानी प्रतियोगिता में कहानी `सुनहरे पल` तथा `अपनी सौतन` के लिए सांत्वना पुरस्कार सहित `फैन आफ द मंथ`,`कथा गौरव` तथा `काव्य रश्मि` का सम्मान भी पाया है। आप ब्लॉग पर भी अपनी भावना प्रदर्शित करती हैंl इनकी लेखनी का उद्देश्य-आत्मिक संतुष्टि एवं अपनी रचनाओं के माध्यम से महिलाओं का हौंसला बढ़ाना हैl आपके लिए पसंदीदा हिन्दी लेखक-प्रेमचंद एवं महादेवी वर्मा हैंl