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होली मर्दानी

बाबूलाल शर्मा
सिकंदरा(राजस्थान)
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(रचना शिल्प:विधान१० वर्ण,१६ मात्रिक, भगण मगण सगण गुरु २११ २२२ ११२ २,दो दो पद समतुकांत हो)
रंग सजे सीमा पर सारे।
शंख बजाए कष्ट निवारे।
संकट आतंकी बन बैठे।
कान उन्हीं के वीर उमेंठे।

राष्ट्र सनेही भंग चढ़ा लो।
शत्रु समूहों को मथ डालो।
ओढ़ तिरंगा ले बन शोला।
केशरिया होली तन चोला।

याद करे संसार रुहानी।
खेल सखे होली मरदानी।
चेत सके आतंक न प्यादे।
चंग सखे ऐसी बजवा दे।

फाग रमे खेले हम होली।
झेल सकें सीमा पर गोली।
लाल गुलाबी रंगत होनी।
भूमि हमारी रक्तिम धोनी।

शीश उतारे शीश कटा दें।
भारत माँ की शान बढ़ा दें।
चंग बजा लें शंख बजा दें।
रंग लगा दें रक्त बहा दें।

गीत सुना हूँकार सुनाएँ।
शेर दहाड़े गीदड़ जाए।
देश हमारे फागुन होली।
सैनिक सीमा रक्त रँगोली।

घात लगाते कायर घाती।
वीर लड़े ये छप्पन छाती।
खूब जलाते हैं हम होली।
युद्ध करें ये सैनिक टोली।

रंग लगाएँ प्रेम करेंगे।
सीम सुरक्षा काज लड़ेंगे।
मान तिरंगे का रखना है।
गान शहीदी का रटना है।

झेल सको बंदूक सुवीरों।
खेल सको होली रणधीरों।
देश हमारा शान हमारी।
पर्व बहाना बात सँवारी।

भारत माँ की सूरत भोली।
चाहत सीमा खून व गोली।
ताकत वीरों खूब सतोली।
मर्द बनो खेलो अब होली।

परिचय : बाबूलाल शर्मा का साहित्यिक उपनाम-बौहरा हैl आपकी जन्मतिथि-१ मई १९६९ तथा जन्म स्थान-सिकन्दरा (दौसा) हैl वर्तमान में सिकन्दरा में ही आपका आशियाना हैl राजस्थान राज्य के सिकन्दरा शहर से रिश्ता रखने वाले श्री शर्मा की शिक्षा-एम.ए. और बी.एड. हैl आपका कार्यक्षेत्र-अध्यापन(राजकीय सेवा) का हैl सामाजिक क्षेत्र में आप `बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ` अभियान एवं सामाजिक सुधार के लिए सक्रिय रहते हैंl लेखन विधा में कविता,कहानी तथा उपन्यास लिखते हैंl शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र में आपको पुरस्कृत किया गया हैl आपकी नजर में लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः हैl