पद्मा अग्रवाल
बैंगलोर (कर्नाटक)
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चाय तू तो कमाल ही करती है,
सुबह की पहली चाय
होंठों से कप को लगाते ही,
दिल कह उठता है वाह चाय!
तेरा तो कोई जवाब ही नहीं,
एक कप चाय केवल दूध
चाय पत्ती, चीनी का मिश्रण ही नहीं है,
वरन् आपसी रिश्तों की शुरुआत है
चाय तू तो कमाल ही करती है…।
सुबह-सुबह शरीर में ताजगी भर देती है,
शाम को पियो तो थकावट हर लेती है
एक कप चाय का प्याला तो सबको ही भाता,
सर्दी है तो अदरक वाली मसाला चाय
गर्मी है तो आइस टी,
बारिश है तो फिर गर्म चाय का प्याला,
और साथ में गरमा-गरम पकौड़े
चाय तू तो कमाल ही करती है…।
चाय तेरी खुशबू से ही दिल खुश हो जाता है,
दिनभर यहाँ वहाँ कितनी भी चाय पी लो
लेकिन घर में आते ही चाय की याद आती है,
चाय तू तो कमाल ही करती है…।
चाय पर चर्चा करते करते ही,
सरकार बदल गई
सच तो यह है, कि
चाय तो केवल सबसे मिलने का बहाना है
दिल कह उठता है सखियों,
आज शाम को चाय पर आना
सब मिलेंगें गपशप करेंगें, मस्ती होगी।
वाह चाय! तेरे क्या कहने,
चाय तू तो कमाल ही करती है॥