राधा गोयल
नई दिल्ली
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लक्ष्य प्राप्त करने में हम पिछड़े ही सदा रहेंगे,
काम संवरने वाले भी बिगड़े सदा रहेंगे
यदि यही सोचते रह जायेंगे कुछ तो लोग कहेंगे,
अपने मन को मार के क्या बेमौत ही नहीं मरेंगे ?
लोगों का काम है कहना, इन बातों में क्यों बहना,
‘कुछ तो लोग कहेंगे’ लोगों का काम है कहना
जीवन में कुछ करना है तो मंजिल पर चलती रहूँगी,
तूफान से टक्कर लेकर, नदिया-सी बहती रहूँगी।
अस्तित्व रखूँ अपना भी, फिर सागर में मिल जाऊँ,
सागर संग अठखेली कर, हीरे-मोती चुन लाऊँ
क्यों बैठ किनारे पर, कुछ पाने की करूँ प्रतीक्षा ?
निष्क्रिय बैठने से क्या, पूरी होती है इच्छा ?
पाने की चाहत है तो, संघर्ष भी करना होगा,
‘कुछ तो लोग कहेंगे’,पर ध्यान न धरना होगा
अच्छा भी अगर करोगे, तब भी तो लोग कहेंगे,
भ्रामक बातें फैलाकर, लोगों के कान भरेंगे।
हर वक्त यूँ ही डर-डरकर जीने का लाभ नहीं है।
लोगों का काम है कहना, उनका तो काम यही है॥