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‘गीता की पाठशाला’ लगाई इंदौर लेखिका संघ ने, शहीदों को दी श्रद्धांजलि

इंदौर (मप्र)।

दुनिया के पवित्र और महान ग्रंथ भगवत गीता को लेकर इंदौर लेखिका संघ ने अनूठा आयोजन किया। ‘गीता की पाठशाला’ नाम से आयोजित इस अभिनव आयोजन में गीता के अध्येता नितिन वैद्य ने कहा कि गीता केवल पूजा घर में रखने के लिए नहीं, बल्कि पढ़ने के लिए भी है। गीता एक पवित्र ग्रंथ है-जीवन जीने की एक कालजयी कला है।
    संघ का यह अनूठा आयोजन पाठशाला के साथ ही २७वें ‘कारगिल विजय दिवस’ के रूप में भी मनाया गया। इस अवसर पर कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए काव्य गोष्ठी के माध्यम से उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को नमन किया गया। 
   आयोजन की शुरुआत भगवद् गीता के शाश्वत ज्ञान को महिला व विशेषकर लेखिकाओं के माध्यम से घर-घर पहुंचाने व आत्मसात करने के उद्देश्य से की गई। मुख्य वक्ता अतिथि गीता अध्येता व लेखक श्री वैद्य ने सभी वर्गों को गीता के मूल्यों को आत्मसात करने का आग्रह किया।

   कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संघ की संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. स्वाति तिवारी ने कहा, कि संघ की लगभग सभी लेखिकाओं ने इस पाठशाला में पेन और कॉपी लेकर व्याख्यान से नोट्स लिए, यह इस बात का प्रमाण है कि यह विषय अपने-आपमें  अनूठा और जिज्ञासाओं से भरा है।
  अतिथियों का स्वागत प्रभा तिवारी एवं कवियत्री सुषमा शुक्ला ने किया।
  दूसरे सत्र की अध्यक्षता श्रीमती मनोरमा जोशी ने की। विशेष अतिथि सुषमा शुक्ला एवं कुसुम सोगानी ने भी रचनाओं का पाठ किया। अतिथि साहित्यकार श्रीमती मुन्नी गर्ग, आशा जैन एवं ममता तिवारी ने कारगिल के युद्ध काल के समय पर चर्चा की।
   पहले सत्र का संचालन लेखिका शीला बड़ोदिया ने किया। आभार डॉ. प्रतीक्षा शर्मा ने व्यक्त किया। दूसरे सत्र का संचालन डॉ. निशी मंज्वानी ने किया।