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चमत्कार

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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यदि एक बार तुम आ जाते
पथ में पराग बिछाते हम,
आलोकित होता जग सारा
और हर्षित होते सारे हम।

यह चमत्कार यदि हो जाए
अनुराग पुष्प अर्पित करती,
याद किया करती हर दिन
वह बीते दिन सुमिरन करती।

यदि काश अगर आ जाते तुम
दिखलाती दुनिया के मिज़ाज,
कैसे-कैसे सब बदल गए
पहले क्या और क्या है आज।

सब मतलब की यह दुनिया है,
नहीं कोई किसी का है अपना।
सब समय-समय की बातें हैं,
जब दिन अच्छा तो सब अपना॥