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मन का आभूषण ‘अभिव्यक्ति’

नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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मन को सजाना ही आभूषण,
स्त्रियों के लिए
मन से दूर रखें- काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, अंहकार अपने
प्रेम, दया, क्षमा, ममता, धैर्य सौहार्द, मन के सच्चे गहने।

पत्नी को परमेश्वर मानते,
पति, पत्नी को सर्वप्रिये मानते
स्त्री का गहना ही पति होते।
आभूषण वही जो पिया मन भाए,
जो जीवनभर सुहागन को गहना 
पहनाए॥