ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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‘रामनवमी’ विशेष….
चैत्र में नवरात्रि का त्योहार जब आता,
भक्तों के मन को तब बड़ा हर्षाता।
माता दुर्गा की पूजा जब होती,
सुबह-शाम माता आरती होती।
चढ़ाते लोग फूल, प्रसाद और रोली,
मिलकर पूजा करते सब हमजोली।
गाते हैं हम सबश्रीराम की महिमा,
गर्व भरी होती है उनकी गरिमा।
चैत्र शुक्ल रामनवमी में जन्म हुआ,
घर-आँगन खुशियों से महक उठा।
पूरा जीवन त्याग-समर्पण भरा रहा,
औरों के लिए आदर्श जीवन रहा।
स्पर्श से शिला अहिल्या नारी बन जाती,
जीवित हो अहिल्या राम का वैभव गाती।
वचन की खातिर चौदह वर्ष वनवास काटे,
ऋषियों की रक्षा खातिर दानव सिर काटे।
संहार किया था रावण का लंका में जाकर,
सीता हरण हुआ था पंचवटी में आकर।
आदर्श पुत्र, पति और भाई का फर्ज निभाया,
माता कैकेयी का श्रीराम ने आभार जताया।
प्रेमवश श्रीराम शबरी के झूठे बेर खाते,
श्रीराम के उत्कर्ष का हम गुणगान गाते।
जन समूह ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाता,
तब सारा माहौल श्रीराम मय बन जाता।
भक्तगण सभी भक्ति में जब डूब जाते,
‘जय श्रीराम, जय श्रीराम’ का नारा लगाते॥