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सावन के गीतों, ग़ज़लों और कविताओं से सजी काव्य चौपाल

भोपाल (मप्र)।

अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की मध्य प्रदेश इकाई की जून मास की काव्य चौपाल की बैठक २७ जून को आयोजित की गई। मानसून के दौर में काव्य की यह चौपाल सभी सदस्यों के कविता रस में डूबते-उतराते बेहद खुशगवार माहौल में सम्पन्न हुई।
        इस सुअवसर पर गोष्ठी में कविताओं और गीतों ने अपनी विविध रंगों की खुशबू बिखेरी। मंच की अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव के आवास पर एकत्रित कवि व कवयित्रियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के पाठ से कार्यक्रम की खूब शोभा बढ़ाई। शुरूआत मधुलिका सक्सेना मधु आलोक के सावन गीत से हुई। शास्त्रीय धुन पर आधारित इस गीत को गाकर कवयित्री ने चौपाल को मधुर आत्मीय आगाज दिया। ‘मनभावन सरसावन सावन आयो री, आली आयो री’ बेहतरीन कविता अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव जी ने सुनाकर सावन की मधुरता पर इंतजार के अहसास की कई लकीरें खींची। ऐसे ही ‘अब के सावन में यूँ टूट कर बरसा पानी, अब के मुलाकात अधूरी सी लगी…’ बेहतरीन गीत संस्था की मप्र इकाई की अध्यक्ष शेफालिका श्रीवास्तव ने प्रस्तुत किया। सावन की ऐसी संगीतमय कविता पर सभी झूम उठे। ‘सावन का त्यौहार, झूला पड़ गये अंबुवा की डार..’ कवयित्री जया आर्य ने सुना कर हर बार की तरह सबका मन जीता, तो संस्था के महासचिव मुजफ्फर इकबाल सिद्दीकी ने ग़ज़ल सुनाई। रेनू श्रीवास्तव, रानी सुमिता, डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव, कीर्ति सिंह और विनीता राहुरीकर आदि ने भी अपनी रचनाओं से बरसती फुहारों के विभिन्न दृश्य रचे।
कार्यक्रम का सुगठित संचालन कर रही आरती शर्मा ने प्रेम की ठहराव से भरी कविता का सुंदर पाठ किया।