कुल पृष्ठ दर्शन : 11

शिकायत नहीं जमाने से

दीप्ति खरे
मंडला (मध्यप्रदेश)
*************************************

अपनों ने मुझे समझा ही नहीं,
क्या गिला करूं जमाने से
अपनों ने छोड़ा साथ मेरा,
अब शिकायत नहीं जमाने से।

संग रिश्तों के मिले थे,
हर रिश्ता दिल के करीब था
बस दर्द मिला उन रिश्तों से,
अब शिकायत नहीं जमाने से।

रिश्तों का भरम टूटा मेरा,
जब साथ ना कोई अपने पाया
बस तन्हाई थी साथी मेरी,
अब शिकायत नहीं जमाने से।

रिश्तों से बरसा प्यार नहीं,
उम्मीद का दरिया सूख गया
मायूस किया जब अपनों ने,
अब शिकायत नहीं जमाने से।

जमाना खराब है सुना था कभी,
पर रिश्तों पर अपने गुमान था।
दिल तोड़ा मेरे अपनों ने,
अब शिकायत नहीं जमाने से॥