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बिछुड़े लम्हें

तारा प्रजापत ‘प्रीत’
रातानाड़ा(राजस्थान) 
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बिछुड़ गए कुछ
लम्हें मुझसे,
जाने क्यों
मालूम नहीं ?
पाया था
उन लम्हों में मैंने,
खुशियों का
अनमोल खज़ाना।
क्या होता है ?
प्रेम का मतलब
उन्हीं लम्हों में जाना।
वो लम्हें हम
कैसे भूले ?
जीवनभर
जो साथ चले,
एक ऐसा
मोड़ आया,
वो मुँह मोड़ चले।
और फिर एक दिन
यूँ ही चलते-चलते,
हाथों से
वक़्त का
दामन छूट गया,
पलभर में
सपनों का दर्पण,
गिरा और, टूट गया।
खो गई है कुछ
यादें पुरानी,
कुछ जानी-सी
कुछ पहचानी।
बिछुड़े लम्हों में
अब जीना है,
दर्द का सागर
अब पीना है॥

परिचय-श्रीमती तारा प्रजापत का उपनाम ‘प्रीत’ है।आपका नाता राज्य राजस्थान के जोधपुर स्थित रातानाड़ा स्थित गायत्री विहार से है। जन्मतिथि १ जून १९५७ और जन्म स्थान-बीकानेर (राज.) ही है। स्नातक(बी.ए.) तक शिक्षित प्रीत का कार्यक्षेत्र-गृहस्थी है। कई पत्रिकाओं और दो पुस्तकों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं,तो अन्य माध्यमों में भी प्रसारित हैं। आपके लेखन का उद्देश्य पसंद का आम करना है। लेखन विधा में कविता,हाइकु,मुक्तक,ग़ज़ल रचती हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-आकाशवाणी पर कविताओं का प्रसारण होना है।

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