मोर नाचे आँगना
डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* पावस की ऋतु आई, बागों हरियाली छाई।टिप-टिप गिरे बूँदें, मोर नाचे आँगना॥ नदी में उफान आया, मन मेरा हरषाया।धरा तन भीग उठा, पूरी होती कामना॥ डगमग नाव चली, बहे नदी गली- गली।ठूंठ से फूटे कोपल, भाग्य सोये जागना॥ घटा घनघोर छाई, बिजली चमक आई।विरह के राग गूँजे, घर आओ साजना॥ … Read more