नजर कभी चाँद पर…

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ ये चाँद किसने टांक दिया है आसमान पर।के रश्क़ आ रहा है मेरे सायबान पर। नज़र कभी चाँद पर कभी सनम पर जाती है,के प्यार आ रहा है इसी जानेजान पर। चाँदनी की ओढ़नी पर तारों का चमकना,जड़े हैं सुंदर सलमे सितारे अपनी शान पर। किसी के बेहद प्यार का करिश्मा है ये,कि … Read more

नासमझ था दिल मेरा

शिखा सिंह ‘प्रज्ञा’लखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************************* नासमझ था दिल मेरा ये उनसे जा टकराया था,उनके गलियों में जाने कौन-सा मज़ा आया थाl भटकते-फिरते उनके तलाश में जो यूं दर-बदर,और शाम होते दर्द-ए-आलम दिल पे छाया थाl नशे में मदहोश हुए गुम हुआ ये सारा ज़माना,उनके आँखों का जाम जो आँखों से चढ़ाया थाl ढूंढती रही मैं जो … Read more

मिट्टी का तन,मिट्टी का जहां

अनिल कसेर ‘उजाला’ राजनांदगांव(छत्तीसगढ़)******************************************** आता जाता है जमाना जी,फिर क्यों हमें घबराना जी। हम रहें ना रहें दुनिया में,मौजूद रहता है फ़साना जी। मिट्टी का तन मिट्टी का जहां,इनका नहीं कोई ठिकाना जी। ना अपना रहे ना पराया यहाँ,सबको जहां से है जाना जी। वफ़ा का क्या कहें हम ‘अनिल’,मुश्किल हुआ इसे निभाना जीll परिचय –अनिल … Read more

मोहब्बत का समंदर बन जाऊँगा

मोहित जागेटियाभीलवाड़ा(राजस्थान)************************************** काव्य संग्रह हम और तुम से…. इन यादों के संग मैं मोहब्बत का सफर बन जाऊँगा।निगाहें देखी जिसको भी मैं तो वो नजर बन जाऊँगा। चलना है जिंदगी के सफर में एक रोज सुबह से शाम,जहाँ जहाँ बस्ती बस जाएगी मैं वो घर बन जाऊँगा। पता नहीं जिंदगी की गाड़ी किस मोड़ पर … Read more

कल तेरी बाँह

गीता विश्वकर्मा ‘नेह’ कोरबा (छत्तीसगढ़)*************************** काव्य संग्रह हम और तुम से…. कल तेरी बाँह का संबल नहीं होने वाला,और मुझ पर तेरा आँचल नहीं होने वाला। इश्क आँखों में लिए बोल रहा है मुझको,मैं तेरे प्यार में पागल नहीं होने वाला। दिल ही दिल में हो रहा है वो परेशान बहुत,कह रहा याद में बेकल … Read more

तुम्हारा क्या नाम लिख दूं ?

अनिरुद्ध तिवारीधनबाद (झारखंड) *********************************** काव्य संग्रह हम और तुम से… मेरी ग़ज़लों में,तुम्हारा,क्या नाम लिख दूं ?पहर कौन-सा है ? सुबह लिखूं या शाम लिख दूं ?कुछ बातें अधूरी,रह गई तख्त पर,जो बची है,क्या सरेआम लिख दूं ? रूह और जिस्म में,थोड़ा,फर्क तो कर लो,तुम्हारा वो तिल या तुम्हारे ज़ज्बात लिख  दूं ?  अभी तो इश्क का फूल खिला ही … Read more

मेरी किश्ती का किनारा था

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)******************************************** साथ उसका बड़ा ही प्यारा था।मेरे जीने का जो सहारा था। मन्नतें मांग कर जिन्हें पाया,वो मेरी किश्ती का किनारा था। वो जमीं पर ख़ुदा की सूरत है,यार रूठा मेरा सहारा था। यूँ तो देखा है ज़िन्दगी में बहुत,सँग उसका हंसी नज़ारा था। उनको पाना ही मेरा था मक़सद,और कुछ भी नहीं गँवारा … Read more

देहक़ान पर कैसी सियासत ?

सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)************************************************** ये सब जो हो रहा है क्या वतन से ये मुहब्बत है।यहाँ देहक़ान पर ये हो रही कैसी सियासत है। वज़ूद अपना किया मिट्टी बना है तब कहीं सोना,मगर मेहरूम हैं वो ही ये ज़र जिसकी अमानत है। खिलाता है जो मेहनत कर निवाले सारे आलम को,उसी के छीनती … Read more

जिंदगानी नहीं आती

अनिल कसेर ‘उजाला’ राजनांदगांव(छत्तीसगढ़)************************************************* लौट कर फिर जवानी नहीं आती,प्यार की फिर कहानी नहीं आती। भूल बैठा था सब कुछ तेरे प्यार में,वो गुज़री हुई जिंदगानी नहीं आती। कौन कहता है कि मर के जी गये,मोहब्बत की अब ज़ुबानी नहीं आती। यारों से मिल कर बातें करते थे कभी,उनसे मुलाकातों में रवानी नहीं आती। छुप के … Read more

दीवारें हटा

जसवीर सिंह ‘हलधर’ देहरादून( उत्तराखंड)********************************* पक्षियों को पालना तो गर्म ये तारें हटा।भाई चारा साधना तो धर्म दीवारें हटा। देश में लड़ना है तो लड़ देश के हथियार से,जो विदेशी हाथ में पहले वो तलवारें हटा। विश्व भर में देख आया लालची है आदमी,राजगद्दी के लिए ये खून की धारें हटा। हड्डियां ही हड्डियां हैं … Read more