जीवन की बन गई कहानी
विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ गीत बनाने बैठी थी पर,जीवन की बन गई कहानी।नीरव गगन गुंजाना था रे,अभिनव किसी गीत के स्वर सेलाना था बसन्त पृथ्वी पर,नवल कल्पनाओं के घर से।कुहू- कुहू कर गाना था पर,गा बैठी चातक की वाणी। ऊँची लहर उठाना थी नव,अविरल अपने मानस सर सेजिसे भरा था मैंने अपनी,सबल लालसा की गागर से।नूतन रीति … Read more